तेजाब हमला पीड़ितों को भी मिलेगा दिव्यांगजनों को मिलने वाली सुविधाओें का लाभ
भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि तेजाब हमले के पीड़ितों को अब दिव्यांगजनों के लिए सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बदलाव किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य उन तेजाब हमले के पीड़ितों को मदद करना है जिन्हें बाहरी विकृति नहीं हुई है।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि तेजाब हमला के पीड़ितों को भी अब दिव्यांगजनों को मिलने वाले सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। सरकार ने कहा कि इसके लिए उसने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बदलाव किया है। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि उसने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 बदलाव करके इस कानून के तहत मिलने वाले लाभों का दायरा बढ़ा दिया है।
सरकार की जानकारी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ के समक्ष सरकार ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कानून में बदलाव की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। सरकार ने कहा कि यह बदलाव उन तेजाब हमला पीड़ितों के लिए है जिन्हें बाहरी रूप से कोई विकृति नहीं हुई है, लेकिन वे अंदरूनी चोटों से पीड़ित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में फैसला सुनाया था कि 2016 के अधिनियम के दायरे में ऐसे तेजाब हमला पीड़ितों को भी शामिल किया जाना चाहिए जिन्हें अंदरूनी चोटें आई हैं, भले ही उन्हें बाहरी रूप से कोई विकृति न हुई हो। इसके बाद केंद्र सरकार ने कहा था कि नोडल मंत्रालय ने 2016 के अधिनियम से जुड़ी अनुसूची में संशोधन की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक संशोधन नहीं हो जाता, तब तक तेजाब हमला पीड़ित शब्द में उन पीड़ितों को भी शामिल माना जाना चाहिए जिन्हें अंदरूनी चोटें आई हैं, चाहे शरीर पर कोई बाहरी विकृति हो या न हो।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई के अपने आदेश में कहा था कि ‘इस स्पष्टीकरण को 2016 के अधिनियम की शुरुआत से ही अनुसूची के सीरियल नंबर 1ए (ई) में शामिल माना जाएगा। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को आवश्यक संशोधन की औपचारिक अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया था। अब सरकार ने बताया कि इस बारे में 22 मई को ही अधिसूचना जारी कर दी गई थी।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम संशोधन की अधिसूचना जारी कर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ‘तेजाब हमला पीड़ित’ शब्द में वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें बाहरी विकृति के बिना भी अंदरूनी चोटें आई हैं।
संशोधन की प्रभावी तिथि
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के माध्यम से 22 मई 2026 की तारीख वाली एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की अनुसूची में संशोधन किया गया है। पीठ ने कहा कि यह संशोधन को उसी तारीख से प्रभावी माना जाएगा जिस तारीख से यह कानून लागू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने ‘चूंकि यह संशोधन स्पष्टीकरण देने वाला है, इसलिए इसे उसी तारीख से लागू माना जाएगा जिस तारीख से 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' लागू हुआ था। इसके जरूरी नतीजे भी होंगे।’ सुप्रीम कोर्ट तेजाब हमला पीड़ित शाहिन मलिक की ओर से दाखिल याचिका पर विचार कर रही है। याचिका में तेजाब हमला पीड़ितों को भी दिव्यांग श्रेणी में लाने की मांग की थी, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
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