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भारतीय अर्थव्यवस्था को एक महीने में मिले ये 5 ऑक्सीजन

nirmala sitharaman announces loan festivals to spur demand

भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक माह के भीतर पांच सौगात दी है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इन फैसलों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर अगली तिमाही से देखने को मिलेगा। 

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि कॉरपोरेट कर में कटौती से कंपनियों का लाभ बढ़ेगा और उत्पादों की कीमतों में कटौती का रास्ता बनेगा। साथ ही सरकार के इस कदम से देश में विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम विदेशी कंपनियों के लिये उपयुक्त समय पर उठाया गया है, जो वैश्विक स्तर पर निवेश के अवसर तलाश रही हैं।

23 अगस्त : वित्त मंत्री ने  विदेशी-घरेलू निवेशकों पर बजट में लगाए अधिभार (सरचार्ज) बढ़ोतरी का फैसला वापस लिया। साथ ही बैंकिंग तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी बैंकों को 70 हजार करोड़ की पूंजी देने की घोषणा की। वाहन उद्योग को राहत देते हुए बीएस-चार वाहन को रजिस्ट्रेशन की पूरी अवधि तक वैध करने की घोषणा की गई।

28 अगस्त : इस दिन वित्त मंत्री ने कोयला खनन और कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दे दी। चीनी के निर्यात पर 6,268 करोड़ की सब्सिडी का ऐलान भी किया। डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 26% एफडीआई को मंजूरी देने के साथ एकल खुदरा ब्रांड में एफीडीआई के नियमों में ढील दी गई। 

30 अगस्त:  सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की। 

19 सितंबर: देशभर में कर्ज की आसान उपलब्धता के लिए 400 जिलों में लोन मेला लगाने की घोषणा की गई। साथ ही एमएसएमई को लोन चुकाने के लिए छह महीने की राहत दी गई। 

20 सितंबर: वित्त मंत्री ने आर्थिक वृद्धि दर को गति देने के लिए बड़ी घोषणा करते हुए शुक्रवार को कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर घटा दी। अब घरेलू कंपनियों के लिये सभी अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी। अब तक यह  34.94% (सेस, सरचार्ज समेत) था। वहीं, एक अक्तूबर के बाद बनने वाली घरेलू विनिर्माण कंपनियां बिना किसी प्रोत्साहन के 15 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान कर सकेंगी। इनके लिए अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत होगी।

आप पर इन फैसलों का क्या असर होगा 

हाल के दिनों में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों से कॉरपोरेट जगत का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ेगा। इससे वो निवेश बढ़ाएंगे और कारोबार को विस्तार देंगे। विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार में अपना निवेश बढ़ाएंगे। इससे आने वाले दिनों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 

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