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जमीन से संसाधन जुटाने की योजना जल्द शुरू करेगी भारतीय सेना, जानें क्यों अटका है यह काम

सेना को सरकार से कुछ समय पूर्व जमीन के बदले अपने लिए संसाधन जुटाने की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन जमीन की कीमतों में भारी गिरावट के कारण इस पर कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अब सेना ने कहा कि जमीन के भाव...

जमीन से संसाधन जुटाने की योजना जल्द शुरू करेगी भारतीय सेना, जानें क्यों अटका है यह काम
मदन जैड़ा,नई दिल्लीFri, 15 Jan 2021 07:45 AM
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सेना को सरकार से कुछ समय पूर्व जमीन के बदले अपने लिए संसाधन जुटाने की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन जमीन की कीमतों में भारी गिरावट के कारण इस पर कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अब सेना ने कहा कि जमीन के भाव बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही स्थितियां बेहतर होंगी, वह जमीन के बदले अपने संसाधन जुटाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। दरअसल, अकसर विकास परियोजनाओं के लिए जब सेना की जमीन ली जाती है तो उसके बदले में जमीन संबंधित महकमे को देनी होती है। लेकिन सड़क, रेल आदि परियोजनाएं बनाने वाले विभागों के पास जमीन नहीं होती। वह राज्यों से पहले जमीन लेते हैं। फिर सेना को जमीन देते हैं। लेकिन कई बार ऐसी जगह पर जमीन दी जाती है जो सेना के किसी काम की नहीं होती है। इस सब के चलते परियोजनाओं में विलंब भी होता है।

पिछले साल अक्तूबर में सरकार ने सेना को अनुमति प्रदान कर दी थी कि वह संबंधित विभाग से जमीन लेने की बजाय उससे अपनी जरूरत के संसाधन हासिल कर सकती है। मसलन जमीन के बदले वह भवन, ऑडिटोरियम, आवासीय परिसर आदि बनवाने को कह सकती है या फिर कोई और सामान की आपूर्ति के लिए कह सकती है जिसकी कीमत जमीन के बराबर हो।

सेना को कई संसाधन मिलने की उम्मीद: सेना प्रमुख

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवने ने कहा कि इससे हमें कई संसाधन हासिल होने की उम्मीद है। लेकिन इस परियोजना पर अभी कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसकी वजह यह है कि जमीन के दामों में भारी गिरावट आई है। इसलिए अभी जमीन के बदले संसाधन लेने में फायदा नहीं है। हम जमीन की कीमतें बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। स्थितियां अच्छी होने के बाद इस दिशा में काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस योजना से सेनाओं को बजट की कमी आड़े नहीं आएगी। दरअसल, हर साल सेना की कई जमीन विकास कार्य के लिए जाती है। लेकिन अब सेना उतनी ही कीमत का काम संबंधित विभाग से अपने लिए करवा लेगी। इससे जमीने के बदले में जमीन देने की जरूरत नहीं रहेगी। दूसरे रक्षा महकमे के खर्च में भी बचत होगी। जमीन हस्तांतरण का कार्य भी जल्दी हो जाएगा।

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