Indian Army Decide Permanent commission for women says Supreme Court - सेना को सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, महिलाओं के स्थायी कमीशन पर फैसला करें DA Image
6 दिसंबर, 2019|4:24|IST

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सेना को सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, महिलाओं के स्थायी कमीशन पर फैसला करें

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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सेना से दो-दूक अंदाज में कहा कि वह उन आठ महिला सैन्य अधिकारियों के स्थायी कमीशन पर फैसला करे जिन्होंने सशस्त्र बलों में अपने समायोजन पर रोक के खिलाफ 2010 में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। दरअसल शीर्ष अदालत के समक्ष कहा गया कि सेना की उन्हीं 10 शाखाओं में महिलाओं को स्थायीय कमीशन देने का फैसला किया गया है जहां उनकी भर्ती शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी)के तहत हुई है।

इस पर न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेना से कहा-हम आदेश दे सकते हैं, लेकिन आप को इसका श्रेय लेने का एक अवसर दे रहे हैं। गत मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को उन रिपोर्ट से भी अवगत कराया गया जिसमें कहा गया है कि महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की शुरुआत अप्रैल, 2020 से होगी।

नौ साल के दौरान सरकार महिलाओं को स्थायी कमीशन देने पर सहमत हो गई, लेकिन सरकार के इस फैसले का लाभ उन महिलाओं को मिलता नहीं दिख रहा है जिन्होंने सबसे पहले अदालत का दरवाजा खटखटाया था। महिला अधिकारियों के वकील ऐश्वर्य भाटी ने अदालत से कहा कि यदि यह रिपोर्ट सही है तो उन महिलाओं को फैसले का लाभ नहीं मिल सकेगा जिन्होंने लिंग भेद के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई। 

सेना की चुनौती
दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2010 में आदेश दिया था कि एसएससी के तहत भर्ती महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए। लेकिन तीनों सेनाओं में से केवल आर्मी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

प्रधानमंत्री महिलाओं अफसरों के पक्ष में
प्रधानमंत्री महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का समर्थन कर चुके हैं। इसके लिए पिछले साल नियम बदले का भी ऐलान किया था कि फाइटर पायलट समेत सभी ब्रांच में एसएससी के तहत महिला अधिकारियों की भर्ती की जाती है।  

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