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सेना की सिक्योरिटी पावर होगी बेमिशाल, सैटेलाइट खरीद के लिए 3 हजार करोड़ रुपये की डील

यह सैटेलाइट एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स से लैस है जो कि सामरिक संचार जरूरतों में सहयोग करेगा। इससे न केवल ग्राउंड पर तैनात सैन्य टुकड़ियों बल्कि दूर से ऑपरेट होने वाले विमानों को भी मदद मिलेगी।

सेना की सिक्योरिटी पावर होगी बेमिशाल, सैटेलाइट खरीद के लिए 3 हजार करोड़ रुपये की डील
Niteesh Kumarराहुल सिंह, हिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीWed, 29 Mar 2023 09:47 PM
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भारतीय सेना की कम्युनिकेशन क्षमता को जबरदस्त बूस्ट मिलने वाला है। रक्षा मंत्रालय ने इस दिशा में बुधवार को बड़ा कदम उठाया। मिनिस्ट्री की ओर से एडवांस्ड कम्युनिकेश सैटेलाइट GSAT 7B की खरीद को लेकर न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ करार हुआ है। मामले के जानकार अधिकारियों ने बताया कि यह कॉन्ट्रैक्ट 3,000 करोड़ रुपये का है। इससे आर्मी की वो जरूरत पूरा होगी जिसका लंबे वक्त से इंतजार है। मालूम हो कि एनएसआईएल इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) का कॉमर्शियल आर्म है। 
  
भारतीय वायु सेना और नौसेना के उलट सेना के पास फिलहाल डेडिकेटेड सैटेलाइट नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, 'इस उपग्रह की मदद से सेना की कम्युनिकेशन क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। इससे सैन्य टुकड़ियों को मिशन से जुड़ी तमाम बारीक जानकारियों हासिल हो सकेंगी।' इस 5 टन के जियोस्टेशनरी सैटेलाइट को ISRO की ओर से स्वदेशी तौर पर विकसित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि सेना को 2026 में यह उपग्रह मिलने की संभावना है।

GSAT 7B से सेना को मिलेगी किस तरह की मदद
अधिकारियों ने कहा कि यह सैटेलाइट एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स से लैस है जो कि सामरिक संचार जरूरतों में सहयोग करेगा। यह न केवल ग्राउंड पर तैनात सैन्य टुकड़ियों बल्कि दूर से ऑपरेट होने वाले विमानों, एयर डिफेंस वेपन्स और अन्य फायर सपोर्ट प्लेटफार्म में भी अहम भूमिका निभाएगा। एयर पावर स्टडी सेंटर के डायरेक्टर जनरल एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (रिटायर्ड) ने कहा, 'यह उपग्रह सेना के लिए लंबे समय से चली आ रही जरूरत को पूरा करेगा। इससे सेना की नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा, ताकि वे अधिक सुरक्षित और जाम-प्रूफ बन सकें। सेना अब तक वायु सेना के GSAT-7A उपग्रह पर निर्भर थी।'

भरोसेमंद सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम हासिल करने पर जोर
सेना ने रूस-यूक्रेन युद्ध में साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वारफेयर का विस्तार से अध्ययन किया है, जिससे प्रभावशाली और भरोसेमंद सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम की अहमियत पता चली है। यह दूर-दराज के इलाकों में भी हाई-स्पीट इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने में मदद करता है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) भारत सरकार की हथियार खरीद से जुड़ी शीर्ष संस्था है। डीएसी ने ऑपरेशनल क्षमताओं को तेज करने के लिए मार्च 2022 में ही GSAT-7B सैटेलाइट के लिए सेना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इसरो की ओर से तैयार GSAT-7 की कम्युनिकेशन क्षमता इतनी अधिक है कि इससे महासागरों में मदद मिलती है।

5,400 करोड़ रुपये के तीन करार पर हस्ताक्षर
गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और एनएसआईएल के साथ 5,400 करोड़ रुपये के तीन करार पर हस्ताक्षर हुए हैं। पहला करार सेना के लिए BEL से स्वचालित वायु रक्षा नियंत्रण रिपोर्टिंग सिस्टम 'प्रोजेक्ट आकाशतीर' की खरीद से जुड़ा है, जिस पर 1982 करोड़ रुपये की लागत आएगी। बीईएल के साथ दूसरा समझौता नौसेना के लिए 412 करोड़ रुपये की लागत से सारंग इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट मेजर सिस्टम की खरीद से संबंधित है। तीसरी डील जीसैट 7B की खरीद से जुड़ी है। ये तीनों प्रोजेक्ट भारत में ही डिजायन, विकसित और विनिर्मित खरीद कैटेगरी के हैं। इससे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।