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नेहरू न होते तो श्रीनगर खो देता भारत, अमित शाह को कांग्रेस का जवाब

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि अगर नेहरू ने बुद्धिमत्ता नहीं दिखाई होती तो भारत श्रीनगर खो देता। उन्होंने कहा कि नेहरू को गाली देना और गलत तथ्य पेश करना भाजपा की आदत बन गई है।

नेहरू न होते तो श्रीनगर खो देता भारत, अमित शाह को कांग्रेस का जवाब
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 06 Dec 2023 10:40 PM
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कांग्रेस ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर की गई टिप्पणी को लेकर निशाना साधा। शाह ने संसद में कहा था कि जवाहरलाल नेहरू की 'भूल' के कारण पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) अस्तित्व में आया। कांग्रेस ने शाह की टिप्पणी को 'गलत' बताया है। शाह ने दावा किया कि नेहरू ने तब युद्धविराम की घोषणा करने का फैसला किया जब भारतीय सेना जीत रही थी। इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कि कांग्रेस ने कहा कि दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध पैदा हो गया था, जिससे युद्धविराम की आवश्यकता पड़ी। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि युद्ध विराम का फैसला तत्कालीन सेना प्रमुख की सलाह के आधार पर लिया गया था।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, "मुझे नहीं पता कि गृह मंत्री की जानकारी का स्रोत क्या है लेकिन ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री को भारतीय सेना के तत्कालीन कमांडर इन चीफ जनरल रॉय बुचर ने सैन्य सलाह दी थी और सलाह यह थी कि पाकिस्तान के साथ युद्ध गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई और इसलिए युद्धविराम अनिवार्य हो गया। ये फैसला तत्कालीन नेहरू कैबिनेट ने लिया था और ये उन्होंने अकेले नहीं लिया था, ये कैबिनेट का फैसला था।"

वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि अगर नेहरू ने बुद्धिमत्ता नहीं दिखाई होती तो भारत श्रीनगर खो देता। उन्होंने कहा, "जवाहरलाल नेहरू को गाली देना और गलत तथ्य पेश करना भाजपा की आदत बन गई है... आप आज कुछ भी कह सकते हैं क्योंकि जवाहरलाल नेहरू जवाब देने के लिए यहां नहीं हैं। अगर जवाहरलाल नेहरू ने अपनी बुद्धि का प्रयोग न किया होता, प्रयास न किया होता तो श्रीनगर हमारे पास नहीं होता।'' कांग्रेस पार्टी के भारत सहयोगी फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि भारत पुंछ और राजौरी भी खो देता।

उन्होंने कहा, "उस समय पुंछ और राजौरी को बचाने के लिए सेना को मोड़ दिया गया था। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो पुंछ और राजौरी भी पाकिस्तान में चले जाते...इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था, लॉर्ड माउंटबेटन और सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी सुझाव दिया था कि इसे संयुक्त राष्ट्र में ले जाना चाहिए।"

शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदु ने कहा कि भाजपा नेहरू को कोसती रहती है। उन्होंने कहा, "बीजेपी 75 साल पुरानी चीजों के बारे में बात कर रही है... आप इतिहास रचने आए हैं लेकिन दूसरों को कोस रहे हैं। आप पंडित जवाहरलाल नेहरू को कोस रहे हैं। और जब आपको 370 हटाकर इतिहास रचने का मौका मिला तो आपने क्या वादा किया था कश्मीर के लोगों? आतंकी हमले खत्म हो जाएंगे। आतंकवाद खत्म हो जाएगा, कश्मीरी पंडित अपने घरों को लौट जाएंगे और जल्द से जल्द चुनाव होंगे। न तो चुनाव हुए और न ही कश्मीरी पंडित भाई-बहन सुरक्षित महसूस कर रहे हैं... और आतंकवादी हमले अभी भी नहीं रुके हैं।'' 

शाह ने बताईं नेहरू की 'दो भूलें'

लोकसभा में बोलते हुए शाह ने पिछले 70 वर्षों से कश्मीर की समस्याओं के लिए नेहरू की "दो भूलों" को जिम्मेदार ठहराया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के दौरान हुए दो ‘बड़े ब्लंडर’ (गलतियों) का खामियाजा जम्मू-कश्मीर को वर्षों तक भुगतना पड़ा। जम्मू कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए उनका कहना था कि नेहरू की ये दो गलतियां 1947 में आजादी के कुछ समय बाद पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय संघर्ष विराम करना और जम्मू-कश्मीर के मामले को संयुक्त राष्ट्र ले जाने की थी।

गृह मंत्री ने कहा कि अगर संघर्ष विराम नहीं हुआ होता तो पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) अस्तित्व में नहीं आता। नेहरू के संदर्भ में शाह की टिप्पणियों का विरोध करते हुए कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2024 में एक बार फिर प्रधानमंत्री बनेंगे और 2026 तक जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा हो जाएगा। गृह मंत्री के जवाब के बाद इन दोनों विधेयकों को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई।

शाह ने जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘दो बड़ी गलतियां नेहरू के कार्यकाल में हुई। नेहरू के समय में जो गलतियां हुई थीं, उसका खामियाजा वर्षों तक कश्मीर को उठाना पड़ा। पहली और सबसे बड़ी गलती वह थी जब जब हमारी सेना जीत रही थी, पंजाब का क्षेत्र आते ही संघर्ष विराम कर दिया गया और पीओके का जन्म हुआ। अगर संघर्ष विराम तीन दिन बाद होता तो आज पीओके भारत का हिस्सा होता।’’

उनका कहना था कि दूसरा ‘ब्लंडर’ संयुक्त राष्ट्र में भारत के आंतरिक मसले को ले जाने का था। शाह ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में नहीं ले जाना चाहिए था, लेकिन अगर ले जाना था तो संयुक्त राष्ट्र के चार्टर 51 के तहत ले जाना चाहिए था, लेकिन चार्टर 35 के तहत ले जाया गया।’’ उनके मुताबिक, ‘‘नेहरू ने खुद माना था कि यह गलती थी, लेकिन मैं मानता हूं कि यह ब्लंडर था।’’

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