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29 अक्तूबर, 2020|12:11|IST

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भारत-अमेरिका के बीच और मजबूत होंगे रिश्ते, टू-प्लस-टू बैठक ने चीन की बढ़ा दी टेंशन

india-us relations will be strengthened amidst tension with china talks between rajnath-espar and ja

भारत और अमेरिका अपने रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने को तैयार हैं। मंगलवार को होने वाली टू प्लस टू वार्ता के लिए सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो और रक्षामंत्री मार्क एस्पर दिल्ली पहुंचे। राजनाथ और एस्पर के बीच और जयशंकर पोम्पियो के बीच अलग अलग द्विपक्षीय वार्ता हुई। राजनाथ सिंह के साथ बातचीत से पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री को रायसीना हिल में साउथ ब्लॉक के बाहर तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

दोनों देशों के विदेश व रक्षामंत्री मंगलवार को भारत-अमेरिका के बीच टू-प्लस-टू वार्ता के तीसरे संस्करण में हिस्सा लेंगे। अमेरिका में चुनाव से महज एक हफ्ते पहले ट्रंप के दो शीर्ष मंत्रियों की यह वार्ता बेहद महत्वेपूर्ण मानी जा रही है। वार्ता में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का चीन का प्रयास और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में उसका आक्रामक व्यवहार भी शामिल है। जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ साल में भारत, अमेरिका का सबसे बड़ा रक्षा व व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। टू प्लस टू वार्ता से साफ संकेत मिल रहा है कि चीन से तनाव के बीच यह रिश्ता और मजबूत होगा।

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पिछले 15 साल में करीब 20 बिलियन डॉलर की रक्षा खरीद
दोनों देश रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में घनिष्ठता के साथ काम कर रहे हैं। पिछले 15 सालों के दौरान भारत ने सी-17 ग्लोबमास्टरर्स और सी-130जे सुपर हरक्यूलिस स्पेशल ऑपरेशन ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट समेत करीब 20 बिलियन डॉलर की रक्षा खरीद की है। ये वायुसेना के बेड़े के अहम आधार बन गए हैं। इसके अलावा हेलिकॉप्टर के मामले में भी अमेरिकी चिनूक और अपाचे की खरीद सशस्त्र बलों के लिए की गई है। सेना अमेरिकी अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर का भी इस्तेमाल कर रही है। नौसेना ने हाल ही में अमेरिकी एमएच-60 रोमियो एंटी-सबमरीन युद्धक बहुराष्ट्रीय हेलिकॉप्टरों को अपनी जरूरतों के लिए चुना है। टू प्लस टू वार्ता में नए रक्षा समझौतो की दिशा भी तय होगी।

तीसरी ‘टू प्लस टू’ वार्ता से उम्मीद
जानकार मानते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को टू-प्लस-टू वार्ता से नई ऊंचाई मिलेगी। टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय वार्ता में विश्व के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच वैश्विक सहयोग की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और आगे उठाए जाने वाले कदमों का खाका तैयार किया जाएगा। अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है और यह चुनाव से पहले ट्रंप सरकार की आखिरी सबसे बड़ी राजनयिक वार्ता होगी। इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों की आगामी चार साल के लिए आधारशिला रखे जाने की संभावना है।

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अंतरिक्ष मे बढ़ेगा सहयोग
जानकारों का कहना है कि भारत अमेरिका से एमक्यू -9 बी ड्रोन खरीद रहा है। परस्पर समझौते के बाद भारत अंतरिक्ष के डाटा का प्रयोग दुश्मन के अड्डों पर हमला करने के लिए कर सकेगा। भारत और अमेरिका के बीच पहले ही तीन मौलिक समझौते हो चुके हैं। इन समझौतों के तहत दोनों देश पहले से ही एक-दूसरे के मिलिट्री संस्थानों का प्रयोग रि-फ्यूलिंग और आपूर्ति के लिए करने में सक्षम हैं। इसके अलावा कम्युानिकेशन के समझौतों के बाद दोनों देश आपस में जमीन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य जानकारियों को साझा कर रहे हैं।

उच्चतम स्तर का संस्थागत तंत्र
भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता दोनों देशों के मध्य एक उच्चतम स्तर का संस्थागत तंत्र है जो भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के लिए मंच प्रदान करता है। जून 2017 में व्हाइट हाउस में प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तय हुआ था कि टू प्लस टू वार्ता साल में दो बार होगी।

पहली वार्ता : अहम सुरक्षा समझौते कॉमकासा पर हस्ताक्षर
पहली बैठक में एनएसजी में जल्द से जल्द भारत की सदस्यता पर बातचीत हुई थी। एनएसजी सदस्यता, अफगान नीति, रक्षा और सुरक्षा पर चर्चा के साथ ही दोनों देशों के बीच अहम सुरक्षा समझौते कॉमकासा पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के बाद अमेरिका संवेदनशील सुरक्षा तकनीक भारत को बेच सकता है ये रास्ता साफ हो गया। भारत पहला ऐसा गैर-नाटो देश है, जिसे अमेरिका से यह सुविधा मिली है।

दूसरी वार्ता : इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एनेक्स समझौते को मंज़ूरी
18 दिसंबर, 2019 को भारत और अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच वाशिंगटन में ‘टू प्लस टू वार्ता’ हुई। इस वार्ता में दोनों पक्षों ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों में बढती साझेदारी को सकारात्मक रुप से स्वीकार किया। इस वार्ता में एक तरफ जहां हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संबंध प्रगाढ़ बनाने को लेकर स्पष्टता देखी गई। वहीं अमेरिका की निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों द्वारा भारत में अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण की राह में एक बड़ी अड़चन समाप्त हो गई। दोनों देशों ने इसके लिए ‘इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एनेक्स’ नामक समझौते को मंजूरी दी है।

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