नए नियमों से ब्रिटेन को निर्यात आसान होगी
भारत ने 15 जुलाई से लागू होने वाले व्यापार समझौते (सीईटीए) के लिए नए नियम जारी किए हैं, जिसमें निर्यातकों को हर बार उत्पत्ति प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं होगी। अब निर्यातक खुद घोषणा करेगा कि उसका सामान भारत में बना है। यह व्यवस्था गलत तरीके से लाभ उठाने वाले देशों को रोकने के लिए की गई है।

नई दिल्ली, एजेंसी। भारत और ब्रिटेन के बीच 15 जुलाई से लागू होने जा रहे व्यापार समझौते (सीईटीए) के लिए सरकार ने सोमवार को नए नियम जारी किए। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने बताया कि अब निर्यातक को हर बार सरकारी एजेंसी से 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' (उत्पत्ति प्रमाणपत्र) बनवाने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था में निर्यातक खुद घोषणा करेगा कि उसका सामान भारत में बना है और व्यापार समझौते के तहत रियायती शुल्क का पात्र है। हालांकि, सिर्फ घोषणा कर देने से शुल्क में छूट नहीं मिलेगी। भारत और ब्रिटेन के कस्टम विभाग पहले इस घोषणा की जांच करेंगे।
जांच सही पाए जाने पर ही आयातक को रियायती सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा। सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि कोई तीसरा देश अपने सामान को भारत या ब्रिटेन का बताकर गलत तरीके से व्यापार समझौते का फायदा न उठा सके।बॉक्स...एक खेप के लिए ही होगी मान्यसीबीआईसी के अनुसार, यह घोषणा सिर्फ एक खेप (शिपमेंट) के लिए मान्य होगी। इसका इस्तेमाल कई बार नहीं किया जा सकेगा। साथ ही यह घोषणा जारी होने की तारीख से 12 महीने तक वैध रहेगी।


