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भारत-ब्रिटेन ने संबंधों में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए रोडमैप 2030 को मंजूरी दी

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Madan Tiwari
Tue, 04 May 2021 11:51 PM
भारत-ब्रिटेन ने संबंधों में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए रोडमैप 2030 को मंजूरी दी

भारत और ब्रिटेन ने मंगलवार को दोनों देशों के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर ले जाने के लिए महत्वाकांक्षी रोडमैप 2030 को मंजूरी दी। साथ ही दोनों देशों ने अवसरों और क्षमताओं का पूरा लाभ उठाने के लिए आरंभिक निष्‍कर्ष हासिल करने के उद्देश्‍य से अंतरिम व्‍यापार समझौते पर विचार करने सहित व्‍यापक और संतुलित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता शुरू करने की घोषणा की। यह फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन ने डिजिटल माध्यम से आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान लिए ।

सम्मेलन के दौरान नयी भारत-ब्रिटेन वैश्‍विक नवाचार साझेदारी आरंभ करने, प्रवासन और आवागमन, डिजीटल और प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, ऊर्जा और दवाई सहित अन्य क्षेत्रों में साझेदारी के नौ समझौतों पर भी हस्‍ताक्षर किए गए। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। मोदी और जॉनसन ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों सहित इसे प्रोत्साहित करने, समर्थन देने या उसे वित्त पोषित करने और पनाह देने की कड़े शब्दों में निंदा की। वार्ता पर जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया, ''आतंकवाद का मुकाबला करने और इससे संबंधित सूचनाएं व खुफिया जानकारियां साझा करने के अलावा अतिवाद और कट्टरवाद के बढ़ते मामलों पर अनुभव साझा करने पर दोनों नेता सहयोग जारी रखने पर सहमत हुए।''

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि दोनों नेता कोविड-19 टीका, उपचार और निदान के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमत हुए। इसके अलावा नाक के जरिए दिए जाने वाले टीके, नियामक और नैदानिक परीक्षण में सहयोग सहित संयुक्‍त अनुसंधान पर भी दोनों नेताओं ने बल दिया। दोनों पक्षों की ओर से वाणिज्यिक भागीदारी की शुरुआत करने की घोषणा को विदेश मंत्रालय ने''एक और कीमती घोषणा करार दिया। जॉनसन के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि भारत और ब्रिटेन के बीच एक अरब पाउंड के नए व्यापार और निवेश की प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा से ब्रिटेन में 6,500 से अधिक नौकरियां सृजित होंगी।

इस पैकेज में ब्रिटेन में 53.3 करोड़ पाउंड का नया भारतीय निवेश शामिल है। इससे स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 6,000 से अधिक नौकरियां सृजित होने का अनुमान है। बयान के अनुसार इसमें सीरम इंस्टीट्यूट का 24 करोड़ पाउंड का निवेश शामिल है। यह निवेश ब्रिटेन में टीका कारोबार और नए बिक्री कार्यालय में किया जाएगा। इससे एक अरब डॉलर से अधिक का नया कारोबार सृजित होने का अनुमान है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि इस शिखर सम्मेलन ने भारत और ब्रिटेन के बीच एक नये अध्याय की शुरुआत की है और साथ ही कहा कि यह रोडमैप दोनों देशों की जनता के स्तर पर संपर्क, व्यापार और अर्थव्यवस्था, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों में अगले 10 सालों तक गहरे संबंधों और मजबूत आदान-प्रदान का रास्ता साफ करेगा। बयान में कहा गया कि एक और बड़ी घोषणा दोनों देशों के बीच बढ़ी व्यापार साझेदारी को दर्शाती है।

यह पूछे जाने पर कि विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़े के प्रत्यर्पण को लेकर क्या दोनों नेताओं के बीच कोई चर्चा हुई, विदेश मंत्रालय में यूरोप मामले के संयुक्त सचिव संदीप चक्रवर्ती ने कहा कि आर्थिक भगोड़ों के प्रत्यर्पण के लेकर भी बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान मोदी ने कहा कि आर्थिक भगोड़ों को सुनवाई के लिए जल्द से जल्द भारत भेजा जाना चाहिए। बैठक के नतीजे के बारे में चक्रवर्ती ने कहा कि यद्यपि यह डिजिटल शिखर सम्मेलन था लेकिन वार्ता ने एक नयी ऊंचाई तय की है और कई मायनों में इससे दोनों देशों के बीच एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला करना और साइबरस्पेस सहित रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर सहयोग मजबूत करने पर सहमत हुए। साथ ही इस दौरान रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास पर भी चर्चा हुई।

दोनों नेताओं ने कोविड-19 की ताजा स्थिति के साथ ही इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में जारी सहयोग और टीके को लेकर सफल साझेदारी पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कोरोना की दूसरी लहर के मद्देनजर भारत को तत्परता से चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए जॉनसन का धन्यवाद किया जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने पिछले साल भर के दौरान ब्रिटेन और अन्य देशों तक दवाइयां और टीके की आपूर्ति के जरिए सहायता पहुंचाने के लिए भारत की भूमिका की सराहना की। दोनों नेताओं ने विश्व की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के बीच व्यापार की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए वाणिज्यिक भागीदारी की शुरुआत की और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया।

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