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चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण दूसरी बार टला, चौथे स्थान के लिए भारत और इजराइल में है रेस, जानें पहले तीन में कौन-कौन हैं शामिल

बेंगलुरु| एजेंसी Published By: Anand
Sun, 05 Aug 2018 06:22 AM
चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण दूसरी बार टला,  चौथे स्थान के लिए भारत और इजराइल में है रेस, जानें पहले तीन में कौन-कौन हैं शामिल

‘चंद्रयान-2’ भारत के महत्वाकांक्षी मिशन को लेकर एक बार फिर इसरो का झटका लगा है। चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण दूसरी बार टल गया है। अक्तूबर 2018 में तय प्रक्षेपण अब संभवत: 2019 में होगा। इस देरी के कारण चांद की सतह पर पहुंचने में इजरायल के साथ दौड़ में भारत पिछड़ सकता है। 
चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को कुद तकनीकी समस्याओं के कारण टाला गया है। जबकि इस साल दिसंबर में इजरायल की एक कंपनी चांद पर अपना मिशन भेजने वाली है।  इजरायल अमेरिका के फेल्कोन-9 रॉकेट के जरिए चंद्रमा पर अपना मिशन भेजेगा जिसके 13 फरवरी 2019 को चांद की सतह पर पहुंचने की संभावना है। भारत और इजरायल के बीच चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बनने के लिए प्रतिस्पर्धा चल रही है। यूआर राव सेटेलाइट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. एम अन्नादुरई ने इस बात की पुष्टि की है कि चंद्रयान-2 को इस साल अक्तूबर के बजाए साल 2019 में लॉन्च किया जाएगा। अन्नादुरई ने कहा कि चंद्रयान-2 को अगले साल जनवरी में प्रक्षेपित किया जाएगा और फरवरी में वह चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा।  अन्नादुरई ने कहा कि चंद्रयान-2 का वजन बढ़ने की वजह से जीएसएलवी एमके-2 की बजाए जीएसएलवीएमके-3 का इस्तेमाल किया जाएगा। इस रॉकेट को ‘द बाहुबली’ भी कहा जाता है जिसका वजन 640  टन है। 

भारतीय ध्वज की स्थायी छाप छोड़ेगा
चंद्रयान-2 के जरिए भारत की कोशिश दुनिया को चांद की सतह पर अपनी सॉफ्ट लैंडिंग कराने की क्षमता दिखाना है। चंद्रयान-2 चांद की सतह पर भारत के ध्वज और प्रतीक का स्थायी छाप छोड़ेगा। 2008 में भारत ने चांद पर अपना पहला मिशन चंद्रयान-1 छोड़ा था, लेकिन तब भारत ने चांद पर क्रैश लैंडिंग कराई थी। इसरो का कहना है कि क्रैश लैंडिंग की वजह से एमआईपी कई टुकड़ों में टूट गया था। 

ये तीन ही करा सके सॉफ्ट लैंडिंग
3 फरवरी 1966 को सोवित संघ के लूना-9 यान ने पहली बार चांद पर साफ्ट लैंडिंग की थी 
2 जून 1966 को अमेरिका ने सर्वेयर-1 यान के जरिए चांद पर दूसरी सॉफ्ठ लैंडिंग कराई 
14 दिसंबर 2013 को चांद पर साफ्ट लैंडिंग कराने वाला चीन तीसरा देश बन गया

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