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एक हाथ इजरायल, दूजा ईरान; दो कट्टर दुश्मनों से एकसाथ डील, भारत ने कैसे मनवाया कूटनीति का लोहा?

Iran Israel and India Diplomacy: जब पूरी दुनिया इजरायल पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही थी, उसी बीच भारत ने ईरान के साथ चाबहार समझौता कर लिया। 13 मई को चाबहार बंदरगाह के परिचालन पर ये डील हुई।

एक हाथ इजरायल, दूजा ईरान; दो कट्टर दुश्मनों से एकसाथ डील, भारत ने कैसे मनवाया कूटनीति का लोहा?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 20 May 2024 06:02 PM
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पिछले सात महीने से इजरायल गाजा पट्टी पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है।  इजरायल को जहां अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों का साथ मिलता रहा है, वहीं हमास को ईरान समर्थन देता रहा है। ईरान सीरिया और लेबनान में भी  विद्रोही लड़ाकों की मदद से इजरायल पर हमलावर रहा है। बाद में ईरान और इजरायल के बीच भी ठन गई। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सांकेतिक हमले किए फिर शांत हो गए लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार रहा। इन दोनों देशों के कट्टर दुश्मनी के बीच भारत ने अपनी कूटनीति का लोहा मनवाते हुए दोनों ही देशों से अलग-अलग डील कर लिए जिसे देख दुनिया अचरज में है।

जब से इजरायल और हमास के बीच जंग छिड़ी है, तब से यह बात सामने आती रही है कि अमेरिका इजरायल को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है लेकिन यह बात पूरी दुनिया से छुपी रही कि भारत ने भी इजरायल को करीब 27 टन विस्फोटक उपलब्ध कराए हैं। भारत की इस नाजुक हथियार कूटनीति पर किसी का ध्यान नहीं गया। इसका खुलासा तब हुआ जब विस्फोटकों से लदे डेनिश ध्वज वाले व्यापारिक जहाज को स्पेन में बंदरगाह सुविधा देने से वंचित कर दिया गया। बाद में ब्रुसेल्स में एक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बेरेस ब्यूनो ने इसका उद्घाटन किया कि भारत से इजरायल को हथियारों की आपूर्ति की गई है।

जब पूरी दुनिया इजरायल पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही थी, उसी बीच भारत ने ईरान के साथ चाबहार समझौता कर लिया।  13 मई को चाबहार के रणनीतिक ईरानी बंदरगाह के परिचालन के लिए 10 साल के अनुबंध पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए। इससे भारत को पश्चिम एशिया के साथ व्यापार का विस्तार करने में मदद मिल सकेगी। यानी भारत ने एक ही समय में जब मिडिल-ईस्ट के दो कट्टर दुश्मन देश आपस में मिसाइल और ड्रोन हमलों में उलझे थे, उस दौरान भारत अपनी कूटनीति की इबारत लिख रहा था।

ईरान के एक राजनयिक ने चाबहार बंदरगाह के परिचालन को लेकर भारत और ईरान के बीच हुए दीर्घकालिक समझौते को द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लिए 'मील का पत्थर' बताते हुए कहा कि यह भविष्य में निवेश के तमाम अवसर मुहैया कराता है। मुंबई में ईरान के कार्यवाहक महावाणिज्य दूत दावूद रेजाई एस्कंदरी ने एक बयान में कहा कि इन अवसरों में चाबहार के शाहिद बहिश्ती बंदरगाह के दूसरे चरण के साथ बीओटी मॉडल पर तीसरे एवं चौथे चरण का विकास भी शामिल है।

दो परस्पर विरोधियों के बीच यह जटिल कदम मध्य पूर्व में भारत की कूटनीतिक रणनीति की बड़ी जीत है। बता  दें कि ईरान और इजरायल स्वाभाविक रूप से कट्टर दुश्मन देश नहीं रहे हैं। उनकी मौजूदा दुश्मनी मुख्य रूप से भूराजनीतिक कारणों की बजाय विचारधारा की वजह से है। ईरान और इजरायल के बीच कोई द्विपक्षीय भूमि विवाद भी नहीं है। दूसरी तरफ भारत और इजराइल विभिन्न रक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। इजरायल भारत को लंबे समय से हथियार सप्लाई करता रहा है। भारत का ईरान के साथ भी मधुर संबंध रहा है। इसी का फायदा उठाते हुए भारत ने विपरीत हालातों में भी इस काम को अंजाम दिया है।