रिपोर्ट : खेती करने वाली आधी भारतीय महिलाएं किसान के तौर पर दर्ज नहीं
भारत में खेती से जुड़ा काम करने वाली करीब आधी महिलाओं को आधिकारिक रूप से किसान नहीं माना गया है, जिससे देश को हर साल 1.2 लाख करोड़ से दो लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 50.5 प्रतिशत महिलाएं बिना वेतन के मददगार के रूप में दर्ज हैं।

भारत में खेती से जुड़ा काम करने वाली करीब आधी महिलाओं को आधिकारिक तौर पर किसान के रूप में दर्ज नहीं है। महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता न मिलने के कारण देश को हर साल 1.2 लाख करोड़ से दो लाख करोड़ रुपये तक के कृषि उत्पादन का नुकसान हो रहा है। यह रिपोर्ट कृषि क्षेत्र से जुड़ी ई-कॉमर्स कंपनी आर्या डॉट एजी ने जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, खेती से जुड़ा काम करने वाली 50.5 प्रतिशत महिलाएं परिवार के खेतों पर बिना वेतन के मददगार के रूप में दर्ज हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा 21.7 प्रतिशत है。
किसान के रूप में दर्ज न होने से नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आंकड़ों में मददगार व्यक्ति को किसान या खेती करने वाला व्यक्ति नहीं माना जाता। इस वजह से अगर किसी महिला को किसान के रूप में दर्ज नहीं किया गया, तो वह कृषि ऋण, कृषि सलाह और प्रशिक्षण, सरकारी खरीद व्यवस्था, खेती के लिए मिलने वाली सब्सिडी और सरकारी योजनाओं के लाभ आसानी से नहीं ले पाती। इन सुविधाओं का लाभ अक्सर जमीन के मालिकाना रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाता है। यह नुकसान इसलिए नहीं है कि महिलाएं कम कुशलता से खेती करती हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि उन्हें कम संसाधनों के साथ खेती करनी पड़ती है।
64.4 प्रतिशत महिलाएं कृषि क्षेत्र से जुड़ी
भारत में कृषि महिलाओं को रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है। देश में काम करने वाली महिलाओं में 64.4 प्रतिशत महिलाएं कृषि क्षेत्र से जुड़ी हैं। 2017-18 में यह आंकड़ा 57 प्रतिशत था। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की बात करें तो यह हिस्सा बढ़कर 76.9 प्रतिशत है। महिलाएं देश में खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन के केवल 11.72 प्रतिशत हिस्से पर काम करती हैं।


