मुश्किलों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत : फिच
फिच रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को ‘बीबीबी-’ पर बरकरार रखा है। एजेंसी ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। हालाँकि, बीएमआई ने आगामी वित्त वर्ष में इस दर के घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है।

नई दिल्ली, एजेंसी। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को ‘बीबीबी-’ पर बरकरार रखा है। रेटिंग का परिदृश्य भी स्थिर रखा गया है। फिच ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट से ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। फिच के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं पर स्थायी असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। एजेंसी ने कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई झटकों का मजबूती से सामना किया है और आगे भी इसके मजबूत बने रहने की उम्मीद है।
जीडीपी वृद्धि का अनुमान
6.4% वृद्धि का अनुमान : फिच ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। एजेंसी के अनुसार, भारत की रेटिंग को मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावना और बेहतर बाहरी वित्तीय स्थिति से समर्थन मिल रहा है। फिच ने कहा कि व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और नीतिगत विश्वसनीयता मजबूत करने के सरकार के रिकॉर्ड से ऊर्जा संकट जैसी निकट अवधि की चुनौतियों के बावजूद आर्थिक वृद्धि को मजबूती मिल सकती है।
सरकारी कर्ज के संकेतक
सरकारी कर्ज घटने की उम्मीद : रेटिंग एजेंसी का मानना है कि तेज आर्थिक वृद्धि से भारत के कर्ज से जुड़े संकेतकों में धीरे-धीरे सुधार होगा और सरकारी कर्ज का बोझ कम होने की संभावना बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने कर्ज-जीडीपी अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह अनुपात 56.1 प्रतिशत था। सरकार ने मार्च 2031 तक इसे घटाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। फिच के अनुसार, मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, आर्थिक वृद्धि और ठोस बाहरी वित्तीय स्थिति भारत को मौजूदा वैश्विक और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती है।
रेटिंग का अर्थ
भारत के लिए ‘बीबीबी-’ रेटिंग के मायने : ‘बीबीबी-’ का मतलब है कि भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता को निवेश के लिहाज से सुरक्षित माना जा रहा है। यह भी संकेत है कि भारत को अपनी तेज आर्थिक वृद्धि, सरकारी कर्ज और राजकोषीय स्थिति में लगातार सुधार करते रहना होगा।यह फिच की निवेश योग्य श्रेणी की सबसे निचली रेटिंग है। इससे ऊपर बीबीबी, बीबीबी और ए श्रेणियां हैं। बीबी से नीचे की रेटिंग निवेश योग्य नहीं मानी जाती। भारत की रेटिंग पर स्थिर परिदृश्य का मतलब है कि फिलहाल इसमें बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।
वृद्धि दर के अनुमानों
वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान: बीएमआई : फिच समूह की कंपनी बीएमआई ने मंगलवार को अनुमान जताया कि पिछले साल के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से अर्थव्यवस्था को मिली बढ़त कम होने और ऊंची महंगाई दर से परिवारों की आय प्रभावित होने के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। बीएमआई ने कहा कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, लेकिन वृद्धि को लेकर जोखिम मुख्य रूप से नकारात्मक हैं। इनमें पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ना और कमजोर मानसून प्रमुख हैं। बीएमआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर धीमी होकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, क्योंकि जीएसटी सुधारों से मिला राजकोषीय प्रोत्साहन कम होगा और महंगाई औसतन 5.4 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी।


