कमजोर मानसून ने देश में बिजली की मांग बढ़ाई
- बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी गहराई रितुराज बरुआ। सितंबर के पहले सप्ताह

सितंबर के पहले सप्ताह में भारत में बिजली की मांग बढ़कर 256 गीगावाट तक पहुंच गई। बिजली की कमी 2 करोड़ यूनिट से अधिक हो गई। करीब 58 ताप बिजली संयंत्र बहुत कम कोयला भंडार पर चल रहे हैं। बिजली की बढ़ती मांग और आपूर्ति में आ रही रुकावटों की यह स्थिति कमजोर मानसूनी बारिश का नतीजा मानी जा रही है।
सिंचाई, एसी के कारण खपत बढ़ी
कमजोर मानसून के कारण किसानों को सिंचाई के लिए भूजल पंपों पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे बिजली की मांग बढ़ी है। गर्मी-उमस बढ़ने से एसी का इस्तेमाल बढ़ा है। धान की खेती के लिए भी काफी पानी की जरूरत होती है। जुलाई-अगस्त में बिजली की मांग में थोड़ी कमी आने के बाद अब इसमें फिर तेजी आई है। मई में बिजली की मांग रिकॉर्ड 270.8 गीगावाट तक पहुंच गई थी। सितंबर के पहले सप्ताह में मांग ज्यादातर समय 255 गीगावाट से ऊपर रही। केंद्रीय बिजली प्राधिकरण का अनुमान है कि इस साल बिजली की अधिकतम मांग 272 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
पानी से बनने वाली बिजली का उत्पादन घटा
कमजोर मानसून के कारण जलविद्युत उत्पादन में भी गिरावट आई है। क्रिसिल के मुताबिक, बारिश की कमी के बीच जुलाई में जलविद्युत उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 14 फीसदी घट गया। बारिश से कोयला उत्पादन और उसकी आपूर्ति में भी देरी हुई है। बिजली की अधिक मांग ने आपूर्ति और मांग के बीच का अंतर और बढ़ा दिया। सितंबर के पहले सप्ताह में बिजली की कमी 2 करोड़ यूनिट से अधिक रही। पिछले साल अच्छी मानसूनी बारिश के कारण बिजली की कमी 10 लाख यूनिट से भी कम रही थी।
कोयले का भंडार 58 संयंत्रों में बेहद कम
ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार घट गया है। मानसून के दौरान कोयले के भंडार में कमी आम बात है, लेकिन इस साल बिजली की मांग अचानक बढ़ने के कारण कमी ज्यादा गंभीर हो गई है। 6 सितंबर तक 190 बिजली संयंत्रों में 2.67 करोड़ टन कोयला मौजूद था, जो करीब 8.5 दिनों के संचालन के लिए पर्याप्त है। इनमें से 58 संयंत्र बेहद कम कोयला भंडार पर चल रहे हैं। इनके पास जरूरी भंडार का 25 फीसदी से भी कम कोयला है।
कोयले की कमी तेजी से पूरी की जा रही
कोयला कंपनियों ने ताप बिजली संयंत्रों को आपूर्ति बढ़ाई है। सरकारी कोयला उत्पादकों ने 6 सितंबर को बिजली क्षेत्र के लिए 444 रेलवे रैक में कोयला भेजा, जबकि 3 सितंबर को 370 रैक भेजे गए थे। बारिश कम होने के साथ कोल इंडिया के खनन क्षेत्रों में भी उत्पादन बढ़ा है। सरकारी कोयला कंपनियों का औसत दैनिक उत्पादन 6 सितंबर को करीब 35 फीसदी बढ़कर 18.3 लाख टन हो गया। यह महीने के पहले तीन दिनों में करीब 13.6 लाख टन प्रतिदिन था।
शाम के समय बिजली की कमी ज्यादा
मौजूदा कमी को अभी बिजली संकट नहीं कहा जा सकता, क्योंकि मांग को बड़े पैमाने पर पूरा किया जा रहा है। बिजली ग्रिड की स्थिरता भी बनी हुई है। कोयले की आपूर्ति भी बढ़ा दी गई है। भूजल पंपों के इस्तेमाल के कारण बढ़ी बिजली की मांग इस महीने के अंत तक बनी रहने की उम्मीद है। दिन के समय बिजली की मांग का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा हो रहा है। बिजली की कमी मुख्य रूप से शाम के समय सामने आती है, जब सौर ऊर्जा का उत्पादन घट जाता है और ताप बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
बढ़ता जा रहा बिजली संकट
अधिकतम मांग (गीगावाट) कमी (मिलियन यूनिट)
1 सितंबर 256.06 13.47
2 सितंबर 255.73 10.15
3 सितंबर 253.76 14.91
4 सितंबर 255 27.26
5 सितंबर 249.03 28.31
6 सितंबर 235.49 20.06
7 सितंबर 257.02 19.57
स्रोत: ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया


