मैंग्रोव को जीवित पारिस्थितिकी तंत्र की तरह बचाना जरूरी: भूपेंद्र यादव
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में कहा कि तटीय मैंग्रोव का संरक्षण केवल पेड़ नहीं बल्कि एक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में महत्वपूर्ण है। गुजरात में आयोजित कार्यशाला में, उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी और तकनीकी निगरानी पर जोर दिया। यादव ने मैंग्रोव एटलस और जीआईएस पोर्टल भी जारी किए।

नई दिल्ली, एजेंसी। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव को केवल पेड़ों के समूह के रूप में नहीं, बल्कि जीवित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में संरक्षित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ये समुद्री जैव विविधता, मछलियों के जीवन, तटों की सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने और स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यादव ने गुजरात के कच्छ स्थित भुज में मैंग्रोव के संरक्षण, पुनर्स्थापना और टिकाऊ प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने मैंग्रोव के संरक्षण के साथ उनके दोबारा विकास, वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और तकनीक की मदद से निगरानी पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में यादव ने गुजरात के मैंग्रोव का एटलस जारी किया और मैंग्रोव भौगोलिक सूचना प्रणाली पोर्टल की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इन दोनों पहलों से राज्य में मैंग्रोव क्षेत्रों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी और उनके संरक्षण से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलेगी।


