आईआईटी के शोध से ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में बनेंगे अत्याधुनिक युद्ध हथियार
कानपुर। हथियार और गोला बारूद बनाने वाली देश की आठ ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में अत्याधुनिक हथियार बनाए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन के विकास के लिए आईआईटी कानपुर का साथ लिया है। एमओयू के तहत स्वदेशी ड्रोन और सुरक्षा तकनीक विकसित की जाएगी, जिससे भारतीय सेना की रक्षा जरूरतों को पूरा किया जाएगा।

कानपुर। हथियार और गोला बारूद बनाने वाली देश की आठ ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में मौजूदा परिवेश और भविष्य में बदली रणनीति के हिसाब से अत्याधुनिक हथियार बनाए जाएंगे। मध्य पूर्व जंग, रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग में घातक ड्रोन की जरूरत को भी महसूस किया गया है। इसलिए रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन और साइबर सिक्योरिटी के सबसे बड़े रिसर्च सेंटर आईआईटी कानपुर का साथ लिया है। अब आईआईटी की रिसर्च पर ड्रोन समेत अत्याधुनिक बैलिस्टिक हथियार बनाए जाएंगे। इसको लेकर कानपुर स्थित ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों की सरकारी रक्षा कंपनी एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (अवेल) और आईआईटी कानपुर के बीच समझौता (एमओयू) हुआ है। अवेल की ओर से निदेशक (ऑपरेशन) किशोर गुरदासानी और आईआईटी कानपुर की ओर से अनुसंधान एवं विकास के डीन प्रो. राजा अंगमुथु ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
आईआईटी-अवेल रिसर्च और प्रोटोटाइप पर करेंगे काम
समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से स्वदेशी मानव रहित हवाई वाहन (ड्रोन), बैलिस्टिक सुरक्षा तकनीक और अन्य उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास पर काम करेंगे। इसका उद्देश्य आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप भारतीय सेना के लिए स्वदेशी रक्षा समाधान तैयार करना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना है। आईआईटी कानपुर ड्रोन, रक्षा तकनीक और अन्य उन्नत क्षेत्रों में अनुसंधान, डिजाइन और शुरुआती प्रोटोटाइप विकसित करेगा। जबकि अवेल अपने आयुध निर्माण नेटवर्क के माध्यम से इन तकनीकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन, असेंबली और परीक्षण करेगा। इससे प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को तेजी से सेना के उपयोग योग्य उत्पादों में बदला जा सकेगा। यह साझेदारी केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देगी। साथ ही देश में अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकों के विकास में तेजी आएगी।
एसएएफ कर चुका ड्रोन माउंटेड गन का सफल ट्रायल
दुश्मन ड्रोन को हवा में ही मार गिराने के लिए अवेल की कानपुर स्थित स्माल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ) ड्रोन माउंटेड गन सिस्टम का सफल ट्रायल कर चुकी है। गुजरात के सूरत और हरियाणा के गुरुग्राम में हुए माउंटिंग ट्रायल की सफलता के बाद अब तीनों मौसमों में विधिवत फायरिंग टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है। माउंटिंग ट्रायल में एसएएफ के प्रोटाटाइप सिस्टम ने फायरिंग कमांड को समझ कर बेहतर नजीते दिए हैं। एसएएफ की टीम सेना की टीम के साथ फायरिंग टेस्ट कराती है। फायरिंग टेस्ट की सफलता रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूत करेगी। कानपुर स्थित डीपीएसयू एडब्ल्यूईआईएल (एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड) की आयुध निर्माणियों में विकसित 40 एमएम और 12.7 एमएम कैलीबर की एयर डिफेंस गन इस सिस्टम में लगेंगी। इसके अलावा अवेल एचएएल के साथ डोर्नियर विमान में गन सिस्टम विकसित करने पर काम कर रहा है।
अवेल की इन फैक्ट्रियों में विकसित होंगे अत्याधुनिक हथियार
1. फील्ड गन फैक्ट्री (एफजीएफ), कानपुर - तोप और फील्ड गन का निर्माण।
2. स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ), कानपुर - राइफल, कार्बाइन और छोटे हथियार।
3. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर (ओएफसी), कानपुर - छोटे हथियारों और रक्षा उपकरणों के पुर्जे।
4. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री तिरुचिरापल्ली (ओएफटी), तमिलनाडु - इंसास, एके-203 से संबंधित हथियारों और मशीनगनों का निर्माण।
5. गन एंड शेल फैक्ट्री (जीएसएफ), काशीपुर, कोलकाता - तोप और गोला-बारूद।
6. गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ), जबलपुर - तोप, गन कैरिज और हथियार प्रणालियां।
7. राइफल फैक्ट्री ईशापुर, कोलकाता- अलग अलग कैलीबर की राइफल हथियार।
8. ऑर्डनेंस फैक्ट्री प्रोजेक्ट कोरवा(ओएफपीकेआर), अमेठी-7.62 कैलीबर राइफल के पुर्जे और एके-203 इंसास राइफल की असेंबलिंग।
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लेखक के बारे में
Suhail Khanशॉर्ट बायो : सुहेल खान पिछले 17 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान' में डिफेंस सेक्टर, ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और पॉलिटिकल खबरों को कवर कर रहे हैं।
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शैक्षणिक पृष्ठभूमि और तकनीकी रिपोर्टिंग
B.Sc और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट होने के कारण सुहेल को विज्ञान और पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला। इसी वजह से वह डिफेंस, रेलवे और पॉवर बीट पर कमांड होने के साथ तकनीकी से जुड़े विषयों पर स्टोरीज़ लिख रहे हैं।
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डिफेंस सेक्टर की खबरों की सुहेल को गहरी समझ है। उन्होंने आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, एचएएल के अलावा डीआरडीओ-डीएमएसआरडीई और ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के रक्षा उत्पादों के विकास और शोध के बारे में कई राष्ट्रीय स्तर की खबरें लिखीं। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवदेनशील सेक्टर होने से डिफेंस की खबरों को लिखने में बरती जाने वाली सावधानियों पर उनकी गहरी समझ है। इस भूमिका को सुहेल ने बखूबी निभाया और देश की सशस्त्र सेनाओं का मनोबल बढ़ाने वाली, उनकी जरूरतों से जुड़े उत्पादों और डिफेंस रिसर्च की एक्सक्लूसिव खबरें लिखी हैं। रक्षा क्षेत्र के अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं। इसके अलावा वह ऊर्जा, रेलवे, ट्रांसपोर्टेशन, ईपीएफओ और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी खबरों के ज़रिये पब्लिक कनेक्ट का विजन रखते हैं। सुहेल का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है—उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
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