भारतीय बैंकों की नजर अब जेन-जी पर
भारत के बैंकों के सामने 40 करोड़ जेन जी आबादी को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ने का बड़ा अवसर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों से युवाओं को जोड़ने और उनके बैंक के साथ संबंध बनाने की अपील की है। इस आयु वर्ग के आकर्षण के लिए बैंकों को बेहतर डिजिटल सेवाएं देने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली। भारत के बैंकों के सामने देश की करीब 40 करोड़ जेन जी आबादी को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का बड़ा अवसर है। हालांकि, युवाओं को अपने साथ जोड़ने की यह दौड़ सिर्फ पारंपरिक बैंकों के बीच नहीं है। नियोबैंक, पेमेंट बैंक, डिजिटल वॉलेट और फिनटेक कंपनियां भी युवाओं को आकर्षित करने के लिए तेजी से अपने उत्पाद और सेवाएं विकसित कर रही हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अधिक से अधिक युवाओं को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने की अपील की थी। इसके लिए अक्टूबर में एक महीने का अभियान शुरू किए जाने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य केवल युवाओं के बैंक खाते खोलना नहीं, बल्कि उनके साथ लंबे समय तक चलने वाला बैंकिंग संबंध बनाना है।
बैंकों के लिए 40 करोड़ ग्राहक वाला बड़ा बाजार
भारत में 1997 से 2012 के बीच जन्मे करीब 40 करोड़ लोग जेन जी की श्रेणी में आते हैं। इनकी उम्र फिलहाल लगभग 14 से 29 वर्ष के बीच है और देश की कुल आबादी में इनकी हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है। हालांकि, भारत में आबादी की उम्र बढ़ने के साथ इस आयु वर्ग का आकार आने वाले वर्षों में घट सकता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक 2050 तक 14-29 वर्ष के लोगों की संख्या घटकर करीब 34.6 करोड़ रह सकती है और आबादी में इनकी हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी हो जाएगी। ऐसे में बैंकों के लिए मौजूदा समय युवाओं को जोड़ने और भविष्य का ग्राहक आधार तैयार करने का अहम अवसर है।
मोबाइल बैंकिंग में बेहतर अनुभव की जरूरत
जेन जी पिछली पीढ़ियों से काफी अलग है। इस पीढ़ी ने इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल सेवाओं के साथ बचपन से ही समय बिताया है। इसलिए बैंकिंग को लेकर भी इसकी अपेक्षाएं अलग हैं। युवा तेज, सुरक्षित और आसानी से इस्तेमाल होने वाले मोबाइल ऐप चाहते हैं। वित्त मंत्री ने भी संकेत दिया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक युवाओं को बहुत ‘कूल’ नहीं लगते। बैंकिंग ऐप की रेटिंग और यूजर फीडबैक से भी पता चलता है कि कुछ बैंकिंग ऐप में धीमी स्पीड, जटिल इंटरफेस और लॉगिन से जुड़ी समस्याएं युवाओं के अनुभव को प्रभावित करती हैं।
यूपीआई ने बदल दिया बैंकिंग का रास्ता
पहले बैंक खाता आमतौर पर नौकरी शुरू करने के बाद खोला जाता था, ताकि वेतन सीधे खाते में आ सके। लेकिन यूपीआई ने इस तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। अब किशोर उम्र से ही युवा डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करने लगे हैं। कई मामलों में ये भुगतान माता-पिता के बैंक खाते से जुड़े यूपीआई ऐप या वॉलेट के जरिये होते हैं। इससे बच्चों और किशोरों की शुरुआती वित्तीय पहचान बैंक की बजाय फिनटेक और डिजिटल पेमेंट कंपनियों के साथ बन रही है। यही वजह है कि फिनटेक कंपनियों को भविष्य के ग्राहकों तक जल्दी पहुंच बनाने का फायदा मिल रहा है।
डिजिटल लोन में भी बढ़ रही हिस्सेदारी
फिनटेक और डिजिटल एनबीएफसी पहले ही बैंकों के पारंपरिक कारोबार में सेंध लगा रहे हैं। वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच स्वीकृत डिजिटल पर्सनल लोन में डिजिटल एनबीएफसी की हिस्सेदारी मूल्य के लिहाज से 12 फीसदी से बढ़कर 19 फीसदी हो गई। वहीं, संख्या के आधार पर यह हिस्सेदारी 66 फीसदी से बढ़कर 77 फीसदी पहुंच गई। छोटे मूल्य के कर्ज की जरूरत वाले युवा इस बाजार के महत्वपूर्ण ग्राहक हैं। फिनटेक कंपनियां तेज मंजूरी, आसान प्रक्रिया और डिजिटल अनुभव के जरिये इन्हें आकर्षित कर रही हैं।
रिवोल्ट और स्लाइस से सीख सकते हैं बैंक
ब्रिटेन की रिवोल्ट इसका एक उदाहरण है। कंपनी ने शुरुआत ऐप से जुड़े प्रीपेड कार्ड के जरिये की थी और सस्ते विदेशी मुद्रा विनिमय की सुविधा देकर युवाओं में लोकप्रिय हुई। सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग ने भी इसकी पहुंच बढ़ाई। बाद में यह पूरी तरह लाइसेंस प्राप्त बैंक बन गई। भारत में स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक भी युवाओं पर केंद्रित मॉडल का उदाहरण है। कंपनी ने कार्ड और क्रेडिट लाइन जैसे उत्पादों से शुरुआत की थी। अब बैंक बनने के बाद भी उसका फोकस युवा ग्राहकों, आसान यूजर इंटरफेस, बचत पर आकर्षक ब्याज, रोजाना ब्याज क्रेडिट, कैशबैक और कार्ड ऑफर जैसे फीचर्स पर बना हुआ है।
छोटी उम्र में ग्राहक को जोड़ना होगा
अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि बैंकों को युवाओं से संबंध बनाने की शुरुआत जितनी जल्दी हो सके करनी चाहिए। सिंगापुर के पोस बैंक का स्मार्ट बडी कार्यक्रम इसका उदाहरण है। इसके तहत स्कूली छात्रों को ऐप से जुड़े स्मार्टवॉच दिए जाते हैं, जिनसे वे स्कूल कैंटीन, बुकस्टोर और अन्य स्थानों पर भुगतान कर सकते हैं। माता-पिता ऐप के जरिये जेब खर्च तय करने और भुगतान पर नजर रखने में सक्षम होते हैं। छात्रों को बचत के लिए प्रोत्साहन और वित्तीय साक्षरता से जुड़ी सामग्री भी मिलती है। 2025 तक इस कार्यक्रम से 335 स्कूलों के 3.20 लाख छात्र जुड़ चुके थे।
युवाओं के हिसाब से बदलनी होगी क्रेडिट रणनीति
जेन जी के लिए क्रेडिट सिर्फ कर्ज नहीं, बल्कि जरूरत और जीवनशैली को पूरा करने का माध्यम भी है। इसलिए बैंकों को क्रेडिट सेवाओं को खरीदारी जैसे रोजमर्रा के डिजिटल अनुभवों में जोड़ने पर ध्यान देना होगा। अमेजन पे के साथ आईसीआईसीआई बैंक का को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड और फ्लिपकार्ट का बॉय नाओ, पे लेटर मॉडल इसके उदाहरण हैं। गैर-वित्तीय सेवाओं के साथ बैंकिंग उत्पादों को जोड़कर कंपनियां ग्राहकों के लिए एक सहज डिजिटल अनुभव तैयार कर रही हैं। ऐसे में ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान बैंकों के लिए सिर्फ नए खाते खोलने का मौका नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी के ग्राहकों को लंबे समय के लिए अपने साथ जोड़ने की रणनीति है। युवाओं को आकर्षित करने के लिए बैंकों को तेज, सरल, सुरक्षित और तकनीकी रूप से बेहतर सेवाएं देनी होंगी। केवल प्रचार अभियान से नहीं, बल्कि बेहतर डिजिटल अनुभव से ही वे फिनटेक कंपनियों के साथ इस प्रतिस्पर्धा में टिक पाएंगे।


