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चिंताजनक : दवा विज्ञान के क्षेत्र में भारत का अनुसंधान कम हुआ

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देश में दवा विज्ञान के क्षेत्र में शोध घट रहे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक 2017 में दवा क्षेत्र में प्रकाशित होने वाले शोधपत्रों की संख्या करीब चार हजार घटी है। जबकि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के मद्देनजर भारत को ज्यादा शोध करने की जरूरत है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के जर्नल करंट साइंस में प्रकाशित एक ताजा शोध में 2013-2017 के बीच दवा अनुसंधान पर छपे शोधपत्रों का लेखा-जोखा तैयार किया गया है।

2016 में इस विषय पर भारत के 12374 शोधपत्र प्रकाशित हुए, लेकिन 2017 में घटकर 8301 रह गए। एक साल में करीब चार हजार शोधपत्र कम हुए हैं जबकि 2013 से इसमें बढ़ोतरी का रुझान था या स्थिति स्थिर रही है।

अमेरिका अव्वल, भारत तीसरे स्थान पर : करंट साइंस का यह शोध मूलत: ब्रिक्स देशों(ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका) में दवा विज्ञान में हो रहे शोधकार्य की तुलना करना है। पांच सालों में भारत ने 52834 जबकि चीन ने 78828 शोधपत्र निकाले। वैश्विक स्तर पर देखें तो अमेरिका ने सबसे ज्यादा 98249 शोधपत्र प्रकशित किए। अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर है।

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गिरावट चिंताजनक : विशेषज्ञों के अनुसार भारत की स्थिति अच्छी है, लेकिन इसमें ताजा गिरावट चिंता पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार नई दवाएं खोजने में पिछड़ने की एक वजह भारतीय बाजार का जेनेरिक दवाओं पर निर्भरता ज्यादा होना है।

71 फीसदी जेनेरिक दवाएं : भारतीय बाजार में 71 फीसदी जेनेरिक दवाएं बिकती हैं जिनका पेटेंट नहीं होने के कारण वे सस्ती हैं। 19 फीसदी दवाएं काउंटर पर बिकने वाली हैं, जिन्हें लोग अपनी मर्जी से खरीदते हैं। सिर्फ 10 फीसदी पेटेंटेड दवाएं बाजार में बिकती हैं।

भारत में दवा क्षेत्र पर प्रकाशित शोधपत्र
 वर्ष         शोधपत्र 
2013      10619
2014      10852
2015      10688
2016      12374
2017      8301

गरीबों की बीमारी पर नहीं होते विकसित देशों में शोध
भारत में जिस प्रकार की बीमारियां हैं उन पर विकसित देशों में शोध नहीं के बराबर होते हैं। मसलन, तपेदिक, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों में विदेशी फार्मा कंपनियों की दिलचस्पी नहीं होती। कारण, इन बीमारियों से ग्रस्त लोग ज्यादातर गरीब होते हैं जिनकी क्षमता महंगी पेटेंटेड दवा खरीदने की नहीं होती। इनकी दवा भारत को खुद खोजनी होगी।

दवा विज्ञान शोधपत्र में ब्रिक्स देश (अवधि 2013-2017)
ब्राजील              11992
रूस                  5837
भारत                52834
चीन                   78828
दक्षिण अफ्रीका    2609

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