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अमेरिकी जेल में बंद निखिल गुप्ता ने नहीं मांगा काउंसलर एक्सेस, रणनीति बना रहा भारत?

अमेरिका में एक सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की सुपारी देकर हत्या कराने की साजिश में शामिल होने के आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया।

अमेरिकी जेल में बंद निखिल गुप्ता ने नहीं मांगा काउंसलर एक्सेस, रणनीति बना रहा भारत?
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 21 Jun 2024 08:57 PM
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अमेरिका की धरती पर खालिस्तानी आतंकवादी के खिलाफ हत्या की साजिश रचने के आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अभी तक कोई काउंसलर एक्सेस की रिक्वेस्ट नहीं की है। भारत सरकार ने शुक्रवार ये जानकारी दी। हालांकि सरकार ने कहा है कि "हम निखिल गुप्ता के परिवार के संपर्क में हैं।" बात दें कि अमेरिका में एक सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की सुपारी देकर हत्या कराने की साजिश में शामिल होने के आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया। 

अमेरिका प्रत्यर्पित किए गए निखिल गुप्ता तक राजनयिक पहुंच के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "उन्हें 14 जून को अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। हमें निखिल गुप्ता की ओर से काउंसलर एक्सेस के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है। लेकिन उसके परिवार ने हमसे संपर्क किया है... और हम इस मामले पर विचार कर रहे हैं कि उनके अनुरोध पर क्या किया जा सकता है।"

काउंसलर एक्सेस का मतलब है कि जिस देश का कैदी है उस देश के राजनयिक या अधिकारी को जेल में बंद कैदी से मिलने की इजाजत दी जाए। काउंसलर एक्सेस खुद जेल में बंद व्यक्ति भी मांग सकता है। इसके अलावा, सरकार चाहे तो वह भी अपने नागरिक से संपर्क कर सकती है। हालांकि काउंसलर एक्सेस को लेकर नियम अलग-अलग देशों में भिन्न हो सकते हैं।

52 वर्षीय गुप्ता को अमेरिकी नागरिक पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोपों में अमेरिका की सरकार के अनुरोध पर पिछले साल चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था। निखिल गुप्ता को अब अमेरिका की एक अदालत में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। अटॉर्नी जनरल मेरिक गार्लैंड ने यह जानकारी देते हुए कहा कि देश अपने नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं करेगा। गुप्ता के अटॉर्नी जेफ्री चाबरोवे के अनुसार, सोमवार को उसे मैनहट्टन संघीय अदालत में मजिस्ट्रेट न्यायाधीश जेम्स कॉट के समक्ष पहली पेशी के तहत प्रस्तुत किया गया, जहां उसने खुद को बेगुनाह बताया।

गार्लैंड ने सोमवार को कहा, ‘‘यह प्रत्यर्पण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि न्याय विभाग अमेरिकी नागरिकों को चुप कराने या उन्हें नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘निखिल गुप्ता पर भारत में सिख अलगाववादी आंदोलन का समर्थन करने के लिए एक अमेरिकी नागरिक को निशाना बनाने तथा उसकी हत्या की कथित साजिश में शामिल रहने के मामले में अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा चलेगा। भारत सरकार के एक कर्मी के निर्देश पर यह साजिश रची गई।’’ मामले में अगली अदालती सुनवाई 28 जून को होगी।

गुप्ता पर सुपारी देकर हत्या कराने और साजिश रचने के आरोप हैं। अगर गुप्ता को दोषी करार दिया जाता है तो उसे प्रत्येक आरोप के लिए अधिकतम 10 साल कैद की सजा सुनाई जा सकती है। डिप्टी अटॉर्नी जनरल लिसा मोनाको ने कहा कि सुपारी देकर हत्या कराने की साजिश, कथित तौर पर भारत सरकार के एक कर्मी द्वारा न्यूयॉर्क शहर में एक अमेरिकी नागरिक की हत्या के लिए रची गई थी। उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक कार्यकर्ता को उसके सर्वोत्कृष्ट अमेरिकी अधिकार-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करने से रोकने का एक शर्मनाक प्रयास था।