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सीमा पार आतंकवाद से 28 साल में पांच हजार सैनिक शहीद, एक साल में 1936 जवान घायल

मानवाधिकार पर यूएन के उच्चायुक्त कार्यालय की कश्मीर पर रिपोर्ट के बाद भारत ने यूएन को तथ्यात्मक जानकारी देकर घाटी में पाक की नापाक हरकतों का काला चिठ्ठा खोला है।

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पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण वर्ष 1990 से अब तक घाटी में 14 हजार से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसमें पांच हजार से ज्यादा सुरक्षा बल के जवान शहीद हुए हैं।

मानवाधिकार पर यूएन के उच्चायुक्त कार्यालय की कश्मीर पर रिपोर्ट के बाद भारत ने यूएन को तथ्यात्मक जानकारी देकर घाटी में पाक की नापाक हरकतों का काला चिठ्ठा खोला है। भारत ने कहा है कि सुरक्षा बलों ने घाटी में उकसावे के बावजूद लगातार संयम का परिचय दिया है। इसकी गवाही इस बात से साबित होती है कि केवल एक साल में वर्ष 2017 के दौरान करीब 1936 जवान आतंकी हिंसा के कारण घायल हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीवन का अधिकार सबसे प्रमुख मानवाधिकार है। लेकिन घाटी में सीमा पार से टल रहे आतंकवाद के कारण यह बुनियादी अधिकार खतरे में पड़ गया है।

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आतंकी संगठनों को पनाह दे रहा पाक
भारत ने मानवाधिकार पर यूएन के उच्चायुक्त कार्यालय को भेजे गए जवाब में घाटी में पाक प्रायोजित आतंकवाद के अभिशाप से मानवाधिकार के सामने पैदा हो रहे संकट का हवाला देते हुए इन तथ्यों पर ध्यान देने को कहा है। भारत ने कहा है कि लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकी संगठनों को पीओके में शरण और प्रशिक्षण दिया जाता है। यह संगठन जम्मू कश्मीर के लोगों पर हमला करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिज्बुल का सरगना सरेआम पाक के टीवी चैनलों पर धमकी देकर स्वीकार करता है कि वह भारत में आतंकी हमलों के लिए कहीं भी हथियार भेज सकता है।

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कवर फायरिंग की आड़ में घुसपैठ जारी
पाकिस्तान की ओर से सीमा पर कवर फायरिंग की आड़ में होने वाली घुसपैठ और आतंकियों को दी जाने वाली वित्तीय मदद की जानकारी भी यूएन को देकर यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय पर तथ्यों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।

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सुरक्षा बलों की चुनौती
पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को मोर्टार, राकेट लांचर, ग्रेनेड, विस्फोटक सहित अन्य हथियार व उपकरण मुहैया कराने का जिक्र भी किया गया है। भारत ने कहा है कि इस तरह के हथियारों का बड़े पैमाने पर घाटी में जब्त किया जाना बताता है कि सुरक्षा बल किस तरह की चुनौती का सामना यहां पाक प्रायोजित आतंक की वजह से कर रहे हैं।

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