भारत–म्यांमार सीमा पर उग्रवादी गुटों की चुनौती से निपटने की तैयारी
भारत–म्यांमार सीमा पर उग्रवादी गुटों की चुनौती से निपटने की तैयारी- सीमा पार आतंक, हथियार, ड्रग्स और उग्रवादी नेटवर्क से निपटने के लिए दोनों देशों ने तेज किया सहयोगनई दिल्ली। विशेष संवाददाताम्यांमार...

भारत–म्यांमार सीमा पर उग्रवादी गुटों की चुनौती से निपटने की तैयारी - सीमा पार आतंक, हथियार, ड्रग्स और उग्रवादी नेटवर्क से निपटने के लिए दोनों देशों ने तेज किया सहयोग
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता
उग्रवादी गतिविधियों का टीकाकरण
म्यांमार के चिन, सागाइंग, काचिन और रखाइन क्षेत्रों में मौजूद कई एथनिक आर्म्ड ऑर्गेनाइजेशन समूह भारतीय पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। इन समूहों की भारतीय क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर मिले खुफिया इनपुट के आधार पर भारत और म्यांमार के बीच कई स्तरों पर मंथन हुआ है । सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखकर सीमा पर बाड़बंदी के अलावा भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले उग्रवादी गुटों पर सख्त कार्रवाई की रणनीति भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा तैयार की गई है।
मादक पदार्थों की तस्करी का खतरा
एक अधिकारी ने कहा , भारत की चिंता यह है कि पूर्वोत्तर के कुछ उग्रवादी संगठन म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों का इस्तेमाल शरण, प्रशिक्षण और रसद के लिए करते रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और म्यांमार के सुरक्षा सहयोग से ऐसे कई नेटवर्क कमजोर हुए हैं, लेकिन चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
भारत–म्यांमार सीमा तथाकथित ‘गोल्डन ट्रायंगल’( डेथ ट्रायंगल) के निकट स्थित है, जो दुनिया के प्रमुख अवैध मादक पदार्थ उत्पादन क्षेत्रों में गिना जाता है। इसी कारण मादक पदार्थों की तस्करी, सिंथेटिक ड्रग्स, हथियारों और नकली मुद्रा की तस्करी भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
अधिकारियों का मानना है कि ड्रग्स से होने वाली अवैध कमाई का इस्तेमाल कई उग्रवादी संगठन अपनी गतिविधियों को वित्तपोषित करने में करते हैं। इसलिए नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय है।
भारत-म्यांमार के बीच सहयोग
एक अधिकारी ने कहा , भारत और म्यांमार के बीच हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में केवल द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार पर ही नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की अवैध आवाजाही और सीमा पार अपराधों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। यह सीमा कई स्थानों पर घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जिससे इसकी निगरानी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर वर्षों से उग्रवादी संगठन, हथियार तस्कर और ड्रग्स नेटवर्क सक्रिय रहे हैं। यहाँ व्यापक स्तर पर बाड़बंदी की योजना पर काम चल रहा है। साथ ही सुरक्षा बलों की रणनीतिक लिहाज से पुनर्तैनाती भी की गई है。


