DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भारतीय सेना ने म्यांमार के साथ मिलकर 12 उग्रवादी ठिकाने तबाह किए

 pti  representative image

भारत और म्यांमार की सेनाओं ने म्यांमार के क्षेत्र में उग्रवादियों के खिलाफ 17 फरवरी से दो मार्च तक समन्वित अभियान में उनके 12 ठिकानों को तबाह कर दिया। यह अभियान कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट परिवहन परियोजना पर संभावित खतरे को टालने के लिए चलाया गया। इस अभियान में 12 हजार ये ज्यादा भारतीय जवानों ने भाग लिया।

सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने सीमा पार जाकर कार्रवाई करने की खबरों से इनकार किया। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने इस अभियान के दौरान सीमा पार नहीं की। गौरतलब है कि इसी दौरान भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के आतंकी शिविर पर हवाई हमला किया था। अधिकारी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य म्यांमार के उग्रवादी समूह अराकान आर्मी के सदस्यों पर कार्रवाई करना था। हाल के समय में म्यांमार सीमा में दक्षिणी हिस्से में काफी संख्या में असम राइफल्स की टुकड़ी तैनात की गई थी।

असम राइफल्स ने म्यांमार सेना के साथ मिलकर उग्रवादियों के खिलाफ यह कार्रवाई की। उग्रवादी म्यांमार में कालादान परियोजना पर काम कर रहे भारतीय कर्मियों को हमले की धमकी देकर पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे थे। यह परियोजना भारत द्वारा वित्तपोषित है। अधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान भारतीय सेना ने नगालैंड और मणिपुर से लगी सीमा के पास सुरक्षा बढ़ाई ताकि उग्रवादी भारत की ओर नहीं आ सकें।

म्यांमार को सैन्य साजो सामान मुहैया कराया

सेना के अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान म्यांमार की सेना को हमने सैन्य साजो सामान मुहैया कराए। इसके अलावा भारत ने म्यांमार सेना को रेडियो सेट भी दिए ताकि ऑपरेशन के दौरान दोनों सेनाओं में संपर्क रहे और किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। 

कई दौर की बैठक के बाद कार्रवाई की योजना बनी

सेना के एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि भारत और म्यांमार के ऑपरेशन से पहले दोनों देशों के अधिकारी संपर्क में थे। इस दौरान कई दौर की बैठक के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई। अधिकारी ने बताया कि इस दौरान हमने म्यांमार सेना के साथ समन्वय में काम किया और हमारा मुख्य उद्देश्य इन उग्रवादियों को भारत आने से रोकना था। 
 
कालादान परियोजना : 

  • कालादान परियोजना का उद्देश्य भारत और म्यांमार को समुद्र और जमीन के रास्ते से जोड़ना है
  • म्यांमार की कालादान परियोजना के वर्ष 2020 तक चालू होने की उम्मीद जताई जा रही है
  • 484 मिलियन डॉलर की लागत आएगी इस परियोजना पर, यह पैसे भारत खर्च करेगा
  • 01 हजार किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी कोलकाता से मिजोरम के बीच की परियोजना के पूरा होते ही
  • चार दिन का समय लगता है करीब अभी कोलकाता से मिजोरम की ये दूरी तय करने में 
  • इसके तहत कोलकता के करीब हल्दिया पोर्ट और म्यांमार के सितवे बंदरगाह को जोड़ा जाएगा
  • सितवे बंदरगाह से फिर हाईवे और कालदन नदी के जरिए मिजोरम को जोड़ा जाएगा  

कार्रवाई में म्यांमार का एक जवान घायल हुआ

सेना के अधिकारी ने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान म्यांमार सेना का एक जवान आईईडी विस्फोटक की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया। इस दौरान उन्होंने दो भारतीय जवानों के शहीद होने की खबरों को भी खारिज किया।

New Zealand Shooting: बेरहम ने 74 पन्नों में खींचा खौफनाक मंजर

Exclusive: सरहद पर जाने से पहले स्पर्म सुरक्षित करा रहे सैनिक

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:India Myanmar army conduct mega ops to protect Kaladan project near border 12 extremist hideouts destroyed