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भारत-मालदीव के रिश्तों को लगेगा लंबा 'ग्रहण', संसदीय चुनाव में जीते चीन समर्थक मुइज्जू

मालदीव के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति मुइज्जू की पार्टी जीत के करीब है। ऐसे में भारत औऱ मालदीव के रिश्ते अभी और खराब हो सकते हैं। मुइज्जू ने यह चुनाव भारत विरोधी अजेंडे पर ही लड़ा था।

भारत-मालदीव के रिश्तों को लगेगा लंबा 'ग्रहण', संसदीय चुनाव में जीते चीन समर्थक मुइज्जू
Ankit Ojhaहिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीMon, 22 Apr 2024 12:09 AM
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मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी वाला गठबंधन संसदीय चुनाव में भी जीत के करीब है। ऐसे में मालदीव और भारत के बीच संबंध और भी खराब हो सकते हैं। दरअसल राष्ट्रपति मुइज्जू चीन के भक्त हैं। ऐसे में भारत और मालदीव के बीच नई सरकार बनने के बाद से ही संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं। वहीं मुइज्जू की पार्टी ने यह चुनाव भारत विरोधी अजेंडे पर ही लड़ा था। वह चीख-चीखकर प्रचार कर रहे थे कि उनकी जीत इस बात पर मोहर लगा देंगे कि भारत के खिलाफ लिए गए फैसले सही हैं। 

मालदीव की मीडिया की मानें तो वोटों की गिनती शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही मुइज्जू की पीपल्स नेशनल कांग्रेस पार्टी 93 में से 59 सीटों पर आगे हो चुकी थी। वहीं विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी केवल 15 सीटों पर आगे थी। बता दें कि MDP ने ही अपनी सरकार के वक्त 'भारत प्रथम' की नीति लागू की थी। उस वक्त दोनों ही देशों के आपसी संबंध चरम पर थे। हालांकि पिछला राष्ट्रपति चुनाव भी एमडीपी बड़े अंतर से हार गई। 

जानकारी के मुताबिक मालदीव्स डिवेलपमेंट अलायंस, जम्हूरी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार कुल सात सीटों पर आगे थे। इससे पता चलता है कि पीएनसी का संसद में बहुमत आने वाला है। बता दें कि मालदीव की 93 सदस्यीय संसदीय चुनाव में करीब 2,84,000 लोगों ने मतदान किया था। मुइज्जू ने कहा था कि यह चुनाव उनकी नीतियों को लेकर एक जनमत संग्रह का काम करेगा। इके अलावा यह चुनाव भारतीय सैनिकों को वापस भेजे जाने के फैसले के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। 

मालदीव में मुइज्जू की सरकार बनने के बाद से ही चीन  का समर्थन दिखाई दे रहा है वहीं सरकार ऐसे कदम उठा रही है जो कि भारत विरोधी हैं। मुइज्जू के मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। इसके अलावा दवा और खाद्यान्न को लेकर अब भारत को छोड़कर मालदीव दूसरे देशों का सहारा देख रहा है। वहीं मालदीव में राहत और बचाव के लिए तैनात भारतीय सैनिकों के दो बैच को मार्च और अप्रैल में वापस भेज दिया गया है। 10 मई तक सभी भारतीय सैनिक मालदीव से वापस आ जाएंगे। 

संसद में बहुमत पाने के बाद मुइज्जू के लिए चीन समर्थक नीतियां लागू करना और आसान हो जाएगा। बता दें कि हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए भारत और चीन दोनों ने ही मालदीव में निवेश किया है। वहीं अब मुइज्जू की सरकार आने के बाद चीन मालदीव के जरिए बड़ी संभावनाएं ढूंढने में लगा है।