इंफो::स्वदेशी स्मार्टफोन ब्रांड की राह में कई चुनौतियां

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

नोट: कृप्या मिंट का लोगो लगाएं शौविक दास नई दिल्ली। आईटी

इंफो::स्वदेशी स्मार्टफोन ब्रांड की राह में कई चुनौतियां

नोट: कृप्या मिंट का लोगो लगाएं शौविक दास

नई दिल्ली। आईटी मंत्रालय ने 62500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम(एमपीएमएस) शुरू की है। 21 अगस्त को इसकी अधिसूचना जारी की गई। योजना के दो हिस्से प्रस्तावित हैं, दूसरे हिस्से में घरेलू स्मार्टफोन ब्रांड बनाने के लिए प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। देश के बड़े स्मार्टफोन बाजार में भारतीय ब्रांड मौजूदगी काफी कम है। प्रोत्साहन योजना के बावजूद स्वदेशी स्मार्टफोन ब्रांड की राह में कई चुनौतियां हैं।

जीडीपी में सीधा योगदान मिलेगा

घरेलू स्मार्टफोन ब्रांड बनाने के पीछे मुख्य सोच यह थी कि देश की जीडीपी में राजस्व का बड़ा और सीधा योगदान मिले, जिसकी कमी आज साफ महसूस की जाती है। हालांकि चीन, वियतनाम, थाईलैंड और मलेशिया की तर्ज पर भारत दुनिया के प्रमुख असेंबली हब्स में शुमार हो चुका है, लेकिन बीते दशक में भारत के अपने ब्रांड कोई खास कमाल नहीं दिखा सके।

भारतीय ब्रांड का क्या मतलब है?

भारतीय ब्रांड के रूप में मान्यता पाने के लिए कंपनी का भारत में पंजीकृत होना, कम से कम 51% हिस्सेदारी भारतीय नागरिकों के पास होना और मुख्य प्रबंधन नियंत्रण किसी भारतीय के पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा, कंपनी के सभी पेटेंट व ट्रेडमार्क भारत में दर्ज होने चाहिए और उसकी अपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट व डिजाइन टीमें देश के भीतर ही काम कर रही हों।

फोन असेंबल करने वाली कंपनियों सहित कोई भी ऐसी संस्था इसके लिए आवेदन कर सकती है

फोन असेंबल करने वाली कंपनियों सहित कोई भी ऐसी संस्था इसके लिए आवेदन कर सकती है, जिसका पिछले वित्तीय वर्ष में न्यूनतम राजस्व 1,000 करोड़ रुपये रहा हो। पात्र कंपनियों को सालाना शुद्ध बिक्री पर 5% कैश इंसेंटिव मिलेगा,जबकि रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डिजाइन और पेटेंट के लिए अतिरिक्त 3% का लाभ दिया जाएगा।

अभी लावा ही कुछ फोन बना रही

नोएडा में 'लावा' अभी स्मार्टफोन बना और बेच रही है। वहीं माइक्रोमैक्स, कार्बन और जोलो जैसे ब्रांड्स, जिनकी लावा के साथ मिलकर 2013 के मध्य में 40% से अधिक बाजार हिस्सेदारी थी, बाजार से लगभग गायब हो चुके हैं। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इनमें से कई कंपनियां नई एमपीएमएस योजना की शर्तों का आकलन कर रही हैं, जिससे उनके खोए हुए ब्रांड्स के दोबारा बाजार में लौटने के संकेत मिल रहे हैं।

चुनौतियां कम नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, 2013 से 2021 के दौरान जब भारतीय स्मार्टफोन बाजार 21% की वार्षिक दर से बढ़ रहा था, तब ब्रांड्स के पास बाजार में उतरने और नए प्रयोग करने के बेहतर अवसर थे। उस वक्त पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों की बड़ी तादाद ने कंपनियों का काम आसान बना दिया था, जो स्थिति आज नहीं है। इसके अलावा, बीते 13 से अधिक वर्षों में वीवो, ओप्पो और वनप्लस जैसे चीनी कंपनियों भारतीय स्मार्टफोन बिक्री के दो-तिहाई हिस्से पर कब्जा जमाया है। विश्लेषकों का मानना है कि टेक ब्रांड्स के हब के रूप में पहचान न होने के कारण भारतीय ब्रांड्स के प्रति उपभोक्ताओं की धारणा बहुत अच्छी नहीं रही है। ऐसे में, किसी भी नए या पुराने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लिए आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में दोबारा जगह बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

असली बदलाव गैर वित्तीय सहायता से

विशेषज्ञों के अनुसार, असली बदलाव गैर-वित्तीय सहायता के जरिए आ सकता है। हालांकि, केंद्रीय आईटी मंत्री ने 21 अगस्त को इस पर खुलकर बात नहीं की और कहा कि आवेदकों की योजनाओं के आधार पर ये नीतियां तय होंगी, जिन्हें आईटी सचिव की अध्यक्षता वाली समिति मंजूरी देगी। इसका अर्थ है कि सरकार भारतीय ब्रांड्स को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत कदम उठा सकती है, जैसे सरकारी क्षेत्र के फोन ऑर्डर में सिर्फ भारतीय ब्रांड्स को प्राथमिकता देना। भले ही इससे आम खरीदार का फैसला सीधे न बदले, लेकिन ऐसी नीतियों से भारतीय ब्रांड्स को इतना आर्थिक सहारा और बाजार मिल जाएगा कि वे डिस्ट्रीब्यूशन, मार्केटिंग और पेटेंट में खुलकर निवेश कर सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

✦इस मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का मुख्य उद्देश्य क्या है?−
इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्मार्टफोन ब्रांड बनाने के लिए प्रोत्साहन देना और देश की जीडीपी में योगदान बढ़ाना है।
Hindustan | Bureau

लेखक के बारे में

Hindustan | Bureau

हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्‍यों सह‍ित देश की राजधानी द‍िल्‍ली और एनसीआर (नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्‍करण प्रकाश‍ित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपर‍ि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद व‍िस्‍तार से न्‍यूज र‍िपोर्ट प्रकाश‍ित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Navratri 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candidates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।
Hindi NewsIndia Newsइंफो::स्वदेशी स्मार्टफोन ब्रांड की राह में कई चुनौतियां