एफटीए में ईयू हर साल एक लाख वाहन भेज सकेगा
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के तहत यूरोपीय वाहन कंपनियों को हर साल एक लाख यात्री वाहनों को रियायती आयात शुल्क पर भारत भेजने की अनुमति मिलेगी। यह कोटा धीरे-धीरे बढ़कर 10वें साल में 1.6 लाख वाहन प्रति वर्ष तक पहुंचेगा। रियायती शुल्क केवल 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर लागू होगा।

नई दिल्ली, एजेंसी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत यूरोपीय वाहन कंपनियों को शुरुआती तौर पर हर साल एक लाख यात्री वाहनों को रियायती आयात शुल्क पर भारत भेजने की अनुमति होगी। शुक्रवार को जारी समझौते के मसौदे के अनुसार यह कोटा धीरे-धीरे बढ़कर 10वें साल से 1.6 लाख वाहन सालाना हो जाएगा। इस व्यवस्था के तहत यूरोपीय संघ में बने पेट्रोल-डीजल जैसे आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया जाएगा। हालांकि रियायती शुल्क का लाभ सभी कारों को नहीं मिलेगा।मसौदे के मुताबिक यह छूट केवल 15,000 यूरो (करीब 16.6 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाली कारों पर लागू होगी।
इससे कम कीमत वाले वाहनों को इस कोटे के तहत किसी तरह की शुल्क रियायत नहीं मिलेगी।रियायती आयात शुल्क वाहन की सीआईएफ (लागत, बीमा और माल ढुलाई) कीमत के आधार पर तय होगा। इससे यूरोपीय वाहन निर्माताओं को भारत के बड़े कार बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर वाहन बेचने का अवसर मिल सकता है। वहीं, घरेलू वाहन कंपनियों के लिए बढ़ती यूरोपीय कारों की प्रतिस्पर्धा एक अहम चुनौती बन सकती है।


