भारत ने सीधे तालिबान व्यवस्था पर उठाया सवाल, PM मोदी ने इन 4 विषयों पर फोकस करने को कहा

भारत ने पहली बार सीधे तौर पर तालिबान शासन की वैधता पर सवाल उठाया है। शुक्रवार को वीडियो लिंक द्वारा अफगानिस्तान मुद्दे पर 21वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के...

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Shankar Pandit विशेष संवाददाता , नई दिल्ली
Last Modified: Sat, 18 Sep 2021 6:19 AM

भारत ने पहली बार सीधे तौर पर तालिबान शासन की वैधता पर सवाल उठाया है। शुक्रवार को वीडियो लिंक द्वारा अफगानिस्तान मुद्दे पर 21वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के सदस्य देशों के नेताओं के संयुक्त शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अफगानिस्तान में सत्ता-परिवर्तन समावेशी नहीं है और बिना समझौते के हुआ है। इससे नई व्यवस्था की स्वीकार्यता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि इससे उग्रवादी समूहों को हिंसा के माध्यम से सत्ता पाने का प्रोत्साहन मिल सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका का समर्थन
प्रधानमंत्री ने कहा, महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों सहित अफगान समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण है। इसलिए, यह आवश्यक है कि नई व्यवस्था की मान्यता पर फैसला वैश्विक समुदाय सोच-समझ कर और सामूहिक तरह से ले। इस मुद्दे पर भारत संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री ने कहा, अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम का सबसे अधिक प्रभाव हम जैसे पड़ोसी देशों पर होगा। इसलिए, इस मुद्दे पर क्षेत्रीय फोकस और क्षेत्रीय सहयोग बहुत ही आवश्यक है।

चार विषयों पर ध्यान देने की जरूरत
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में हमें चार विषयों पर ध्यान देना होगा। पहला विषय अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन व्यवस्था के समावेशी न होने और बिना समझौते के सत्ता में बदलाव का है। दूसरा विषय है कि अगर अफगानिस्तान में अस्थिरता और कट्टरवाद बना रहेगा, तो इससे पूरे विश्व में आतंकवादी और चरमपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा मिलेगा। अन्य उग्रवादी समूहों को हिंसा के माध्यम से सत्ता पाने का प्रोत्साहन भी मिल सकता है। पीएम मोदी ने कहा, ‘हम सभी देश पहले भी आतंकवाद से पीड़ित रहे हैं। इसलिए हमें मिल कर सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान की धरती का उपयोग किसी भी देश में आतंकवाद फैलाने के लिए न हो।’ उन्होंने कहा कि एससीओ के सदस्य देशों को इस विषय पर सख्त और साझा मानक विकसित करने चाहिए। आगे चल कर ये मानक वैश्विक आतंकरोधी सहयोग के लिए भी एक टेम्पलेट बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा ये मानक आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस (शून्य सहिष्णुता) के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए। इनमें सीमा पार आतंकवाद और आतंकी फंडिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक कोड ऑफ कंडक्ट होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, इनके लागू करने की प्रणाली भी होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, अफगानिस्तान के घटनाक्रम से जुड़ा तीसरा विषय यह है कि इससे ड्रग्स, अवैध हथियारों और अवैध मानव व्यापार का अनियंत्रित प्रवाह बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार अफगानिस्तान में रह गए हैं। इनके कारण पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बना रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन पर नजर रखने और सूचनाओं को साझा करने की प्रवृत्ति बढ़ाने के लिए एससीओ का तंत्र सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

प्रधानमंत्री ने चौथा विषय अफगानिस्तान में गंभीर मानवीय संकट को बताया। उन्होंने कहा कि वित्तीय और व्यापार प्रवाह में रुकावट के कारण अफगान जनता की आर्थिक विवशता बढ़ती जा रही है। साथ में कोविड की चुनौती भी उनके लिए यातना का कारण है। पीएम मोदी ने कहा, हम अपने अफगान मित्रों तक खाद्य सामग्री, दवाइयां आदि पहुंचाने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि अफगान समाज की सहायता के लिए हर क्षेत्रीय या वैश्विक पहल को भारत का पूर्ण सहयोग रहेगा।

मध्य एशिया को प्रगतिशील संस्कृति का गढ़ बताया
मध्य एशिया का क्षेत्र शांत और प्रगतिशील संस्कृति व मूल्यों का गढ़ रहा है। सूफीवाद जैसी परंपराएं यहां सदियों से पनपी और पूरे क्षेत्र और विश्व में फैलीं। पीएम ने कहा, मध्य एशिया की इस धरोहर के लिए एससीओ को कट्टरपंथ से लड़ने की साझा रणनीति बनानी चाहिए। भारत में और एससीओ के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी उदाहरवादी, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएं और परम्पराएं मौजूद हैं। एससीओ को इनके बीच एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। इसके लिए हमें अपने प्रतिभाशाली युवाओं को विज्ञान और विवेकपूर्ण सोच की ओर प्रोत्साहित करना होगा।

बिना नाम लिए सीपीईसी पर आपत्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य एशिया के लिए संपर्क (कनेक्टिविटी) परियोजनाओं की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही बिना चीन और सीपीईसी प्रोजेक्ट का नाम लिए इस तरह के कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर इशारों में अपनी आपति भी दर्ज की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संपर्क का कोई भी प्रयास एकतरफा नहीं हो सकता। इसे सुनिश्चित करने के लिए ऐसी परियोजनाओं में सहभागी होने की जरूरत है। इसमें सभी देशों की क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान निहित होना चाहिए। ईरान में चाबहार बंदरगाह में भारत का निवेश और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण गलियारे में हमारे प्रयास इसका समर्थन करते हैं। बैठक में पीएम मोदी ने रुपे कार्ड, यूपीआई और कोविन का भी जिक्र किया।

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