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28 अक्तूबर, 2020|8:56|IST

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लद्दाख में कामयाब नहीं हो पाएगी चीन की कोई चालबाजी, लंबे समय तक तैनात रहने को तैयार भारतीय सेना

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भारत-चीन के बीच अप्रैल महीने से पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी जारी है। भारत लद्दाख में तैनात अपने सैनिकों को लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान करने की लगातार पूरी कोशिश कर रहा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि लद्दाख में आने वाले समय में पड़ने वाली कड़ाके की सर्दी में भी 50 हजार सैनिकों की तैनाती की संभावना है, जोकि चीन की किसी भी चालबाजी से निपटने के लिए काफी होगा।

अधिकारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि विशेष सर्दियों के कपड़े, राशन, आर्कटिक टेंट से लेकर पोर्टेबल हीटर तक पहुंचाने के लिए सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर तकरीबन रोजाना लद्दाख के लिए उड़ान भर रहे हैं। मंगलवार को सामने आईं नई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि किस तरह सेना ऊंचाई वाली जगह पर तैनात जवानों तक चीजें पहुंचाने के लिए असाधारण प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि उपकरण पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम भी उठाए गए हैं।

लद्दाख के हालात को लेकर लोकसभा में दिए गए जवाब में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बताया कि मैं आपको आवश्वस्त कर सकता हूं कि हमारे जवानों का मनोबल ऊंचा है। इसके अलावा, हम किसी भी हालात के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। 

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इससे पहले, सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 3 सितंबर को लद्दाख में सेना तैयारियों का जायजा लिया था। उन्होंने फॉरवर्ड इलाकों का दौरा करते हुए लॉजिस्टिक्स अरेंजमेंट्स की समीक्षा की थी। चीन ने 50,000 सैनिकों, 150 विमानों, टैंकों, भारी तोपों, मिसाइलों और एयर डिफेंस आदि की पूर्वी लद्दाख की सीमा पर तैनाती की है। भारत भी ड्रैगन की सभी हरकतों का माकूल जवाब दे रहा है।

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि हमारे सैनिकों का दृढ़ संकल्प प्रशंसा योग्य है। वे लंबे समय से सियाचिन और कारगिल जैसे बेहद कम तापमान और ठंडे रहने वाले ऊंचाई के क्षेत्र में रहने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि निचले सदन को सशस्त्र बलों के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए।

शीर्ष भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों की पूर्वी लद्दाख में तनाव को कम करने के लिए इस सप्ताह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एक बैठक के आयोजित होने की संभावना है। वहीं, कोर कमांडर-रैंक के अधिकारी अब तक पांच बार बैठक कर चुके हैं, लेकिन गतिरोध खत्म करने में विफल ही साबित रहे। बता दें कि 29-30 अगस्त की रात को भारतीय सेना ने चीनी घुसपैठ को नाकाम करते हुए दक्षिणी पैंगोंग की अहम चोटियों पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद से भारत को चीन के मुकाबले बढ़त हासिल है।

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  • Web Title:India China Standoff: In response to China s actions Indian troops ready for long haul in Ladakh