मकानों को ऊर्जा दक्ष बना दिया जाए तो डेनमार्क जैसे चार देशों के बराबर बिजली बचा सकता है भारत

आजकल नए भवनों को ऊर्जा दक्ष बनाने के उपाय हो रहे हैं, लेकिन पुराने घरों को भी काफी हद तक ऊर्जा दक्ष बनाया जा सकता है। चूंकि पुराने भवनों की डिजाइन में बदलाव संभव नहीं है, इसलिए ऐसे भवनों में बिजली की...

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मदन जैड़ा, हिन्दुस्तान , नई दिल्ली। Himanshu Jha
Last Modified: Mon, 14 Sep 2020 6:33 AM

आजकल नए भवनों को ऊर्जा दक्ष बनाने के उपाय हो रहे हैं, लेकिन पुराने घरों को भी काफी हद तक ऊर्जा दक्ष बनाया जा सकता है। चूंकि पुराने भवनों की डिजाइन में बदलाव संभव नहीं है, इसलिए ऐसे भवनों में बिजली की खपत में कमी लाकर उन्हें ऊर्जा दक्ष बनाया जा सकता है। यदि देश के 24.95 करोड़ मकानों को ऊर्जा दक्ष बना दिया जाए तो अगले दस साल में करीब 138.5 टेरावाट बिजली की बचत की जा सकती है। यह डेनमार्क की साढ़े चार साल की बिजली खपत के बराबर है। 

देश में उद्योग क्षेत्र के बाद सबसे ज्यादा बिजली की खपत घरों में होती है। केंद्र सराकर की एनर्जी स्टैस्टिक्स रिपोर्ट 2020 के अनुसार, कुल 24 फीसदी बिजली घरों में खर्च होती है। सभी प्रकार के भवनों को जोड़ दिया जाए तो यह 30 फीसदी हो जाती है। बड़े पैमाने पर एलईडी अपनाने से उजाले के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली की खपत में करीब 75 फीसदी की कमी हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र विद्युतीकरण और बढ़ते शहरीकरण से बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

ग्लोबल बिल्डिंग परफारमेंस नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 तक देश में घरेलू बिजली की कुल खपत 213 टेरावाट थी, जो 2030 में बढ़कर 490 टेरावाट तक पहुंच जाएगी। यानी 277 टेरावाट की खपत बढ़ जाएगी, लेकिन यदि सभी मौजूदा भवनों में ऊर्जा दक्षता के उपाय लागू कर दिए जाएं तो खपत में होने वाली इस वृद्धि को 50 फीसदी कम किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में 2030 तक बिजली की कुल खपत 352 टेरावाट तक ही पहुंच पाएगी। इस प्रकार 138 टेरावाट बिजली बचाई जा सकेगी। डेनमार्क की पूरे साल की खपत 30 टेरावाट के करीब है। 

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार घरों में इस्तेमाल होने वाले सभी बिजली उपकरणों के लिए या तो ऊर्जा दक्षता मानक उपलब्ध नहीं हैं या उन्हें अनिवार्य नहीं बनाया गया। नतीजा यह है कि दोनों तरह के उपकरण बाजार में उपलब्ध हैं। लोगों में जागरूकता की कमी है। इसलिए वे कम कीमत के उपकरण को खरीदने में प्राथमिकता देते हैं। नतीजा यह हो रहा है कि आज घरों में सिर्फ उजाले के उपकरणों में ही करीब-करीब पूरी तरह से एलईडी इस्तेमाल हो रहा है। सरकार ने अभियान चलाया है, लेकिन एसी, हीटर इमर्सन राड, किचन चिमनी, वाटर पंप, वाशिंग मशीन, प्रेस समेत ऐसे कई घरेलू उपकरण हैं जिनके लिए ऊर्जा दक्षता मानक या तो लागू नहीं हुए या फिर वे स्वैच्छिक हैं।

घरों को ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए कई ऊपाय करने होंगे
ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. समीर मैथेल के अनुसार, घरों को ऊर्जा दक्ष बनाकर बिजली की खपत रोकी जा सकती है। इसके लिए दो स्तरों पर उपाय किए जा सकते हैं। एक घरों में इस्तेमाल होने वाले सभी बिजली चालित उपकरण ऊर्जा दक्ष हों। दूसरे, मौजूदा भवनों में बाहरी गर्मी को रोकने के लिए उपाय किए जाएं। खिड़कियों एवं छतों में अतिरिक्त उपाय करके घर के भीतर के तापमान से कम किया जा सकता है। इससे एसी, कूलर या पंखे के इस्तेमाल में कमी लाई जा सकती है। इन उपायों से मौजूदा घरों में बिजली की खपत में 30 फीसदी तक कमी लाई जा सकती है।

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