भारत 4,000 करोड़ रुपये का ऋण भूटान को देगा
भारत और भूटान ने एक उच्चस्तरीय बैठक में विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। दोनों देशों ने 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। भारत ने 45 इलेक्ट्रिक वाहन भूटान को सौंपे और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

भारत और भूटान ने उच्चस्तरीय बैठक में भारत की मदद से भूटान में चल रही विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान दोनों देशों ने 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण (लाइन ऑफ क्रेडिट) के समझौते पर हस्ताक्षर किए और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इससे भारत भूटान को 4,000 करोड़ रुपये तक का ऋण देगा। इस पैसे का इस्तेमाल भूटान में सड़क और पुल बनाने, बिजली, अन्य बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास से जुड़ी अन्य परियोजनाओं पर किया जाएगा। भारत ने भूटान की सरकार को 45 इलेक्ट्रिक वाहन भी सौंपे。
भूटान विकास सहयोग वार्ता
भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता का पांचवां दौर आयोजित हुआ। इसकी सह-अध्यक्षता भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भूटान के विदेश सचिव दाशो पेमा लेक्टुप दोर्जी ने की।
क्रियान्वयन की समीक्षा
भूटान स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर लिखा कि भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत भारत की सहायता से चल रही परियोजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
प्रगति की समीक्षा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने भारत द्वारा दिए जा रहे 10,000 करोड़ रुपये के सहयोग की प्रगति की भी समीक्षा की। दोनों देशों के विदेश सचिवों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारत की सहायता से विकसित थिम्फू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का भी उद्घाटन किया। साथ ही एम्स और भूटान के खेसर ग्यालपो यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के बीच स्वास्थ्य शिक्षा और शोध में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। विदेश सचिव विक्रम मिस्री 30 से 31 जुलाई तक दो दिवसीय भूटान दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता की सह-अध्यक्षता की।


