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Hindi News देश'बंगाल सरकार ने फैलाया झूठ', तीस्ता मामले पर ममता बनर्जी की नाराजगी पर केंद्र का जवाब

'बंगाल सरकार ने फैलाया झूठ', तीस्ता मामले पर ममता बनर्जी की नाराजगी पर केंद्र का जवाब

सीएम ममता बनर्जी ने पत्र में कहा, 'मैं आपके ध्यान में लाना चाहूंगी कि भारत के पूर्वी हिस्से और बांग्लादेश में कई वर्षों में नदी का आकार बदल गया है, जिससे पश्चिम बंगाल वंचित हो गया है।'

'बंगाल सरकार ने फैलाया झूठ', तीस्ता मामले पर ममता बनर्जी की नाराजगी पर केंद्र का जवाब
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 24 Jun 2024 11:28 PM
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केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दावे को गलत बताया है, जिसमें उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से तीस्ता जल बंटवारे पर बातचीत में बंगाल सरकार को शामिल नहीं किया गया। सोमवार शाम को इस मामले को लेकर केंद्र की ओर से बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया, 'पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से झूठा दावा फैलाया जा रहा है। ऐसा कहा गया कि फरक्का में गंगा जल बंटवारे पर 1996 की भारत-बांग्लादेश संधि पर आंतरिक समीक्षा के लिए उनसे परामर्श नहीं लिया गया। 24 जुलाई 2023 को भारत सरकार ने इस मामले को लेकर बनी 'समिति' में पश्चिम बंगाल सरकार से नामित व्यक्ति की मांग रखी।' 

केंद्र की ओर से जारी बयान में कहा गया, '25 अगस्त 2023 को पश्चिम बंगाल सरकार ने समिति के लिए चीफ इंजीनियर, सिंचाई और जलमार्ग निदेशालय, पश्चिम बंगाल सरकार के नामांकन की सूचना दी। इसके बाद 5 अप्रैल 2024 को ज्वॉइंट सेक्रेटरी (वर्क्स), सिंचाई और जलमार्ग विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार ने फरक्का बैराज के डाउनस्ट्रीम के विस्तार को लेकर अगले 30 साल के लिए अपनी मांग से अवगत कराया था।'

ममता ने पत्र लिखकर जताया विरोध 
दरअसल, ममता बनर्जी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा और तीस्ता नदी जल बंटवारा व फरक्का संधि का मामला उठाया। चिट्ठी में अपनी नाखुशी का इजहार करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री से पश्चिम बंगाल सरकार को शामिल किए बिना पड़ोसी देश के साथ ऐसी कोई चर्चा नहीं करने का भी आग्रह किया। यह पत्र मोदी की हाल ही में दिल्ली में उनकी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय वार्ता के मद्देनजर लिखा गया था, जिसमें दोनों नेताओं के बीच मुलाकात का विवरण राष्ट्रीय मीडिया में आने के बाद बनर्जी ने कुछ करीबी लोगों के समक्ष कथित तौर पर नाराजगी व्यक्त की थी।

पीएम मोदी को लिखे तीन पन्नों के पत्र में कहा, ‘मैं यह पत्र बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की हालिया यात्रा के संदर्भ में लिख रही हूं। ऐसा लगता है कि बैठक के दौरान गंगा और तीस्ता नदियों से संबंधित जल बंटवारे के मुद्दों पर चर्चा हुई होगी। परामर्श और राज्य सरकार की राय के बिना इस तरह का एकतरफा विचार-विमर्श और वार्ता ना तो स्वीकार्य है और ना ही वांछनीय है।' उन्होंने कहा कि बंगाल का बांग्लादेश के साथ भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बहुत करीबी रिश्ता है। पानी बहुत कीमती है और लोगों की जीवन रेखा है। हम ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर समझौता नहीं कर सकते, जिसका लोगों पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे समझौतों के प्रभाव से पश्चिम बंगाल के लोग सबसे अधिक पीड़ित होंगे।
(एजेंसी इनपुट के साथ)