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1 अप्रैल, 2020|11:02|IST

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बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तार लगाने के प्रोजेक्ट में देरी, दो करोड़ की आएगी लागत

bsf personnels petroling at indian vs bangladesh border in assam

सीमा पार से अंजाम दिए जाने वाले अपराधों पर लगाम लगाने और हत्याएं रोकने के लिए भारत-बांग्लादेश सरहद पर स्टील के तारों की बाड़ तैयार करने की परियोजना में देरी हो रही है। बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल से इसकी अनुमति नहीं मिल पाई है। अधिकारियों ने बताया कि पूर्वी (बांग्लादेश) और पश्चिम (पाकिस्तानी) सीमा पर घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील स्थानों पर भारत इस तरह के तारों की बाड़ लगाएगा। इसमें ऊपर कंटीले तार लगे होंगे।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आधुनिक किस्म के तार से निश्चित ही पाकिस्तान सीमा पर आतंकवादियों के घुसपैठ और हथियार तथा प्रतिबंधित चीजों की तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, जबकि बांग्लादेश सरहद पर तारबंदी से दोनों ओर के नागरिकों के मारे जाने को लेकर इस मुद्दे को भी सुलझाएगा।

दो करोड़ की लागत आएगी
बाड़ लगाने पर प्रति किलोमीटर दो करोड़ रुपए की लागत आएगी। तार इस तरह होगा कि इसे काटा नहीं जा सकेगा, इस पर चढ़ा नहीं जा सकेगा और यह जंग रोधी होगा। इसलिए, दोनों तरफ के अपराधी अपनी गतिविधियां अंजाम नहीं दे पाएंगे।

2010-19 के बीच 107 तस्कर मारे गए
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2010-19 के बीच इस सीमा पर बीएसएफ के साथ हिंसक झड़पों में 107 भारतीय तस्कर या अपराधी मारे गए। इसी अवधि में इस तरह के अपराध में 135 बांग्लादेशी नागरिक मारे गए। इस साल, ऐसी घटनाओं में करीब 18 बांग्लादेशी मारे गए।

2010-19 के बीच 11 जवान शहीद
वर्ष 2010-19 में इस तरह की 1890 से ज्यादा घटनाओं में ऐसे प्रयासों को नाकाम बनाते हुए 11 बीएसएफ जवान शहीद हो गए और 960 कर्मी घायल हुए।

बांग्लादेश की अनुमति का इंतजार
इस बीच गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किसी भी तरह के ठोस काम के लिए दूसरे पक्ष की सहमति भी जरूरी है। बांग्लादेश सीमा पर कुल 4096 किलोमीटर सरहद में करीब 96 किलोमीटर तक नए कंटीले तार लगाए जाने हैं।

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  • Web Title:India Bangladesh Steel fence project to stop cross border killings along Bangladesh border rusting