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भारत के एयर डिफेंस सिस्टम के आगे पानी भरेगा इजरायली आयरन डोम, चीन-पाकिस्तान के छूटेंगे पसीने

डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआर-एसएएम) प्रणाली की क्षमताएं रूसी एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली जैसी ही होंगी।

भारत के एयर डिफेंस सिस्टम के आगे पानी भरेगा इजरायली आयरन डोम, चीन-पाकिस्तान के छूटेंगे पसीने
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 03 Nov 2023 10:05 PM
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चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से भारत के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। दोनों देशों से लगने वाली सीमाओं पर हथियारों और भारतीय सेना की तैनाती हर समय रहती है, ताकि कोई अनहोनी न हो जाए। बॉर्डर इलाकों पर भी भारत इंफ्रास्ट्रक्चर को मजूबत करता रहता है। पड़ोसी देशों के साथ टेंशन के बीच भारत एक ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम बना रहा है, जिससे दुश्मनों के पसीने छूट जाएंगे। इस सिस्टम के आगे इजरायल का नामी आयरन डोम भी पानी भरता नजर आएगा। दरअसल, भारत ने 2028-2029 तक अपनी लंबी दूरी एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय रूप से तैनात करने की योजना बनाई है। इसका नाम प्रोजेक्ट कुशा रखा गया है। यह एयर डिफेंस सिस्टम 350 किमी तक की दूरी पर आने वाले स्टील्थ फाइटर प्लेन्स, विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और सटीक-निर्देशित हथियारों का पता लगा सकते हैं और उन्हें नष्ट कर सकते हैं। यानी कि चीन और पाक जैसे दुश्मन देशों की एक छोटी सी भी गलती उन पर भारी पड़ सकती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट कुशा के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआर-एसएएम) प्रणाली की क्षमताएं रूसी एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली जैसी ही होंगी। मई 2022 में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति द्वारा मिशन-मोड परियोजना के रूप में एलआर-एसएएम प्रणाली को मंजूरी देने के बाद, रक्षा मंत्रालय ने पिछले महीने भारतीय वायुसेना के लिए अपने पांच स्क्वाड्रनों की खरीद के लिए आवश्यकता (एओएन) की स्वीकृति प्रदान की। इस एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए लंबी दूरी की निगरानी की जा सकेगी।

इसमें विभिन्न प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें होंगी जो 150 किमी, 250 किमी और 350 किमी की दूरी पर दुश्मन देशों की ओर से दागी गईं मिसाइलों को टारगेट करके ढेर करने के लिए तैयार की गई हैं। डीआरडीओ के अनुसार, रणनीतिक और सामरिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में व्यापक वायु रक्षा कवर प्रदान करने के लिए, एलआर-एसएएम कम-रडार क्रॉस-सेक्शन वाले उच्च गति वाले लक्ष्यों के खिलाफ भी असरदार होगा। एक सूत्र ने कहा, "इसे 250 किलोमीटर की दूरी पर लड़ाकू विमानों के लक्ष्यों को मार गिराने के लिए तैयार किया जाएगा, जिसमें AWACS (हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली) और मध्य हवा में ईंधन भरने वाले बड़े विमानों को 350 किलोमीटर की दूरी पर रोक दिया जाएगा।" 

एलआर-एसएएम की फायरिंग यूनिट्स भारतीय वायुसेना के एकीकृत वायु कमांड और नियंत्रण प्रणाली (आईएसीसीएस) के साथ इंटरेक्ट करने में सक्षम होंगी, जो एक पूरी तरह से स्वचालित वायु रक्षा नेटवर्क है। लड़ाकू विमानों से लेकर जमीन पर आधारित मिसाइलों तक, भारतीय वायुसेना के पास इस कार्य के लिए कई हथियार प्रणालियां तैनात हैं। ग्राउंड सिस्टम में पुरानी इग्ला, ओएसए-एके-एम और पेचोरा मिसाइलों से लेकर नए इजरायली निम्न-स्तरीय स्पाइडर त्वरित-प्रतिक्रिया मिसाइल (15-किमी रेंज), स्वदेशी आकाश क्षेत्र रक्षा मिसाइल (25-किमी) और बराक शामिल हैं। 8 मध्यम दूरी के एसएएम सिस्टम (70 किमी से अधिक) संयुक्त रूप से इजरायल के साथ डेवलप किए गए हैं।

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