मुंशी जी ने कहा आज हमारा देश आजाद हो गया... खुशी से झूमे लोग
15 अगस्त 1947 को देश की आजादी की खबर सुनकर बुजुर्गों के लिए यह सुखद एहसास था। आजादी से पहले का डर और अत्याचार समाप्त हो गया था। 92 वर्षीय रामकिशोर और चंद्रावती जैसे बुजुर्गों ने उस दिन की खुशियों को आज भी जिंदा रखा है।

रामसनेहीघाट। 15 अगस्त 1947 की सुबह जब पता चला कि देश आजाद हो गया है, तो डर के साए में जी रहे लोगों के लिए खुली हवा में सांस लेने का वह पहला एहसास था। यह सुखद एहसास बड़े बुजुर्गों के जेहन में आज भी जिंदा है। इनकी माने तो उस दिन की खुशी के सामने आज के बड़े-बड़े आयोजन भी फीके लगते हैं। यह खुशी दो सौ सालों की गुलामी की बेबसी, भय, अत्याचार और असुरक्षा से मुक्ति की थी। उम्र के सौवें पड़ाव पर पहंुचने वाले बुजुर्गों से जब इसको लेकर बात की गई तो झुर्रियों में छिपी बूढ़ी आंखों में उस ऐतिहासिक पल की चमक देखते बनी। कहा कि तब गांव के मुंशी जी ने सुबह सबेरे गांव में आकर कहा कि आज हमारा देश आजाद हो गया...।
प्रभातफेरी में मिली आजादी की खबर
आजादी की 79वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता संग्राम की यादें 92 वर्षीय रामकिशोर के जेहन में आज भी ताजा हैं। भानपुर निवासी रामकिशोर बताते हैं कि 15 अगस्त 1947 को वह 12 वर्ष के थे। सुबह अचानक विद्यालय में प्रभातफेरी निकलने की सूचना मिली। मास्टर साहब ने बताया कि देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया है। यह सुनते ही बच्चों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।
अंग्रेजी हुकूमत का खौफ
रामकिशोर बताते हैं कि आजादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत का खौफ गांवों में साफ दिखाई देता था। गांव में गिरदावल या अंग्रेजी शासन के कर्मचारी के आने की खबर मिलते ही लोग घरों में छिप जाते थे। कोई छत पर तो कोई खेतों में जाकर छिप जाता था। लोगों के मन में हर समय भय बना रहता था।
आजादी की खुशी का माहौल
लेकिन 15 अगस्त की सुबह जैसे ही आजादी की खबर मिली, माहौल पूरी तरह बदल गया। गांव के बुजुर्गों ने मिठाई बांटी। बाजार में भी लोग घरों से निकलकर चौक-चौराहों पर पहुंच गए। भारत माता और महात्मा गांधी के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। बच्चे प्रभातफेरी में शामिल होकर आजादी का जश्न मनाने लगे।
सिर्फ अंग्रेजों से मुक्ति नहीं
रामकिशोर कहते हैं कि आजादी केवल अंग्रेजों से मुक्ति नहीं थी, बल्कि डर के माहौल से निकलकर सम्मान और अधिकार के साथ जीने की शुरुआत भी थी।
मुंशी जी ने कहा-आज हमारा देश आजाद हो गया...
उम्र का एक शतक पार कर चुकीं वयोवृद्ध चंद्रावती की आंखों में 15 अगस्त 1947 की वह सुबह आज भी ताजा है। न गांव में रेडियो था, न समाचार पहुंचाने का कोई साधन। आजादी की पहली खबर गांव के मुंशी जी ने सुनाई थी-‘आज हमारा देश आजाद हो गया।’ यह सुनते ही जैसे पूरे गांव की सांस थम गई और फिर खुशी का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसे चंद्रावती आज तक नहीं भूल पाईं।
खुशियों का सैलाब
भेदुआ ठाकुरान गांव निवासी चंद्रावती बताती हैं कि यह खबर देखते ही देखते पूरे गांव में फैल गई। स्कूल में रैली निकाली गई। बच्चों के हाथों में तिरंगा था और उनके लगाए नारों से पूरा गांव गूंज उठा। लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और कुछ ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर आजादी की खुशी मनाई। वह कहती हैं कि उस दिन की खुशी के सामने आज के बड़े आयोजन भी फीके लगते हैं।
अंग्रेजी मुलाजिम का खौफ
आजादी से पहले के दिन याद करते ही चंद्रावती सहम जाती हैं। कहती हैं कि अंग्रेजी मुलाजिम के गांव में आने की खबर मिलते ही पूरा गांव खाली हो जाता था। जिसे जहां जगह मिलती, वहीं छिप जाता था। किसी को भरोसा नहीं रहता था कि कब किसे पकड़ लिया जाए। तब गांव में न पक्की सड़कें थीं और न आने-जाने के ठीक रास्ते।
खुले हवा में सांस लेने का पहला एहसास
चंद्रावती कहती हैं कि 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी की खबर सिर्फ एक सूचना नहीं थी, वह डर में जी रहे लोगों के लिए खुली हवा में सांस लेने का पहला एहसास था।


