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इनके घर कब मनेगा जश्न-ए-आजादीः पापा आज मिलें, तो 75 साल के होंगे

agra

पुरोहित परिवार ने आज भी साल गिनना नहीं छोड़ा है। बेटे विपुल के अनुसार यदि आज पापा मिल जाएं तो वे 75 साल के होंगे। 47 साल गुजर गए तब का उनका बेटा विपुल अब पिता को इस तरह से याद कर रहा है। बेटे के दिल-ओ-दिमाग पर पिता की यादें तरोताजा हैं।  परिवार ने फ्लाइट ले. मनोहर पुरोहित के लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। सेना-सरकार के प्रयासों के साथ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लंबित है, जिसमें पापा की वापसी का मामला इंटरनेशनल कोर्ट तक ले जाने का आग्रह किया गया है।

1971 के भारत-पाकिस्तान के युद्ध के समय फ्लाइट ले. मनोहर पुरोहित आगरा एयरबेस पर तैनात थे। 9-10 दिसंबर 1971 की रात को वह बमवर्षक जहाज लेकर पाकिस्तान की तरफ गए थे। बताया गया कि वहां उनके जहाज को गोली लगी। वह जहाज कभी वापस लौटकर नहीं आया। मनोहर पुरोहित का भी कुछ पता नहीं चला। 

कोर्ट में सुनवाई के बाद माना जीवित
विपुल पुरोहित कहते हैं कि 1971 की जीत के हीरो ले. जनरल जगजीत सिंह ने बहुत साल पहले गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार की सूची में शामिल गायब सैनिकों को जीवित मानने और उनके समयानुसार प्रमोशन की मांग की थी। गुजरात हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उनकी मांग को माना था। बाद में सरकार के द्वारा उन्हें सभी सुविधाएं भी प्रदान की गईं। 

शिखर बैठक में भी उठा मुद्दा 
आगरा में भारत-पाक के बीच हुई शिखर बैठक के दौरान संपादकों की बैठक में भी जब यह सवाल उठा तो मुशर्रफ ने जवाब दिया था कि वह खुद फौजी हैं, अगर इस तरह का मसला हो तो वहां जेल में जाकर जांच कर लें। बाद में 13 परिवारों का प्रतिनिधिमंडल गया था। मगर पुरोहित वहां नहीं मिले। इसके बाद पुरोहित सहित इस प्रकार के सैन्य अफसरों को प्रमोशन मिले हैं। पुरोहित को भी विंग कमांडर माना गया। 1993 में उन्हें रिटायर माना गया। रिटायरमेंट के बाद परिवार को पेंशन भी मिलनी शुरू हो गई। मगर उनका कभी पता नहीं लग पाया।

परिवार ने किया संघर्ष
पुरोहित को खोजने के लिए परिवार ने धरती-आसमान एक किया। जहां उम्मीद दिखी वहां तक पहुंचने की कोशिश की। इसी दौरान गायब सैनिकों के कुछ परिजन उनको खोजते हुए ओमान में मसीरा टापू पर स्थित जेल तक पहुंच गए। वहां एक सैनिक के परिजन गए तो वहां चाय लेकर जो सैनिक आया वह पंजाबी में बात कर रहा था। उससे कुछ बातें पता चलीं। उन्होंने भारत सरकार से जांच कराने की मांग की थी। हालांकि कोई नतीजा नहीं निकला। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। इस मामले में सरकार अभी काम नहीं कर रही है।

पल-पल बदलते रहे हालात
मनोहर की पत्नी सुमन पुरोहित पति का जिक्र आते ही भावुक हो जाती हैं। सेना और सरकार के लगातार प्रयासों के बावजूद भले ही सफलता न मिली हो पर वह नाउम्मीद नहीं है। वह कहती है- भगवान पर भरोसा है। देश की रक्षा के लिए पति ने बहादुरी दिखाई है, भगवान उन्हें हम तक अवश्य पहुंचाएंगे। हालांकि उन्होंने  भारत सरकार को अपने पति को तलाशने के लिए कई पत्र लिखे, परंतु सरकार ने उन्हें मृत मान लिया। इसके बाद संसद में सरकार ने ऐसे सैनिकों की सूची जारी कि जो पाकिस्तानी जेलों में बंद थे। इस सूची में मनोहर पुरोहित का नाम था। इस सूची के सामने आने के बाद परिवार में फिर एक बार आशा जागी कि वह वापस आ सकते हैं।

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  • Web Title:independence day agra purohit family wait for his father is missing from 1971 war