: हाईवे पर रॉंग साइड की रफ्तार बन रही मौत का कारण
गरानी फेल, नियमों की उड़ रहीं धज्जियां हाईवे से शहर तक गलत दिशा में फर्राटा, हादसों के बाद भी नहीं चेत रहे जिम्मेदार फोटो 2 परिचय- सेंट्रल जेल चौराहे क

फर्रुखाबाद, संवाददाता। इटावा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हादसों की संख्या बढ़ रही है। जिसके लिए कहीं न कहीं समय बचाने की होड़ और रॉंग साइड की ड्राइविंग जिम्मेदार है। समय बचाने के चक्कर में लोग अपनी और साथी की जान से खिलवाड़ कर रहे है। हाईवे पर रॉँग साइड से आने वाले वाहनों को कोई देखने वाला भी नहीं है। आए दिन हादसे होने के बाद भी जिम्मेदार नहीं चेत रहे हैं और सड़क सुरक्षा अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित है। जनपद से इटावा-बरेली राजमार्ग करीब 55 किलोमीटर होकर गुजरता है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर आबादी वाले क्षेत्र में भले ही सुरक्षित आवागमन के लिए लेन बनाई गई हो मगर आने-जाने के मार्ग पर जिस तरह से यातायात नियमों की धज्जियां उड़ रही है उसमें कहीं न कहीं जिम्मेदारों की लापरवाही भी सामने आ रही है। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने हाईवे की पड़ताल की तो सामने आया कि रॉंग साइड्र ड्राइविंग के चलते सबसे अधिक हादसे हो रहे है। आबादी वाले क्षेत्रों में जहां पर आने जाने के लिए अलग लेन हैं। वहां पर भी खुलेआम खतरनाक स्थिति देखी गई। आने-जाने का अलग- अगल रास्ता होने के बाद भी अक्सर वाहन जल्दबाजी में गलत दिशा में वाहन चलाते हैं। ऐसे में पीछे से आने वाले वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने का भी खतरा बना रहता है और इस तरह से कई बार यहां पर हादसे भी हो चुके हैं। यह स्थिति तब है जबकि यहां पर पुलिस चौकी बगल में ही है। मगर जल्दबाजी और शार्टकट का इस्तेमाल करने में लोग अपनी जान जोखिम में डालने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। पांचालघाट पुल पर भी गलत दिशा में वाहन घुसने से जाम की गंभीर समस्या बन रही है। मसेनी क्षेत्र के आस पास घनी आबादी क्षेत्र है। यहां पर सुरक्षित यातायात के लिए दो लेन तो हैं मगर जिस दिशा में वाहन को आना जाना चाहिए उस दिशा में अक्सर वाहन आते जाते नहीं दिखते हैं। कट दूर होने की वजह से अक्सर लोग गलत दिशा में ड्राइविंग करते हैं इससे हादसे का डर बना रहता है। लापरवाही की बात तो यह है कि गलत दिशा में अक्सर लोड वाहनों को अनलोड भी किया जाता है। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। यही स्थिति सेंट्रल जेल चौराहे के आस-पास हाईवे पर है। यहां पर भी रॉंग साइड ड्राइविंग से लोग अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालने का काम कर रहे हैं। यहां से निकलने वाले वाहन कट तक जाने से बचने के लिए गलत दिशा में दौड़ा देते हैं। मोहम्मदाबाद से होकर जो हाईवे गुजरता है वह भी आबादी और बाजार वाला क्षेत्र है। यहां पर भी हमेशा खतरा बना रहता है। जल्दबाजी के चक्कर में लोग वाहन का संचालन गलत दिशा में ही नहीं करते बल्कि पैदल लोग भी गलत दिशा की ओर रुख करते हैं। इससे खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग खुद ही मौत का रास्ता चुन रहे हैं。
सड़क सुरक्षा अभियानों में भी रॉंग साइड पर कोई बात नहीं
कहने को तो परिवहन और यातायात विभाग की ओर से सड़क सुरक्षा और यातायात माह जैसे अभियान चलाये जाते हैं। इन अभियानों से भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जिम्मेदारों की नजरों के सामने ही लोग नियम तोड़ते दिखते हैं। अभियानों में रॉंग साइड पर लोगों को जागरूक करने की दिशा में भी कोई काम नहीं होता है। हाईवे पर जब भी चेकिंग अभियान चलाया जाता है तो इसमें भी वाहन किस दिशा में और किस रफ्तार में चल रहे हैं इस पर भी जिम्मेदारों की लापरवाही सामने दिखाई पड़ती है। इसमें सबसे बड़ा कारण सख्ती की कमी है। हाईवे पर यातायात विभाग के कोई स्थायी चेकिंग प्वाइंट तक नहीं हैं।
पुलिस की निगरानी भी फेल
राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस की निगरानी भी फेल दिखाई पड़ रही है। पिछले वर्षों में जिस तरह से हादसे दर हादसे हुए हैं उनमें कई हादसे ऐसे हुए हैं जो कि रॉंग साइड ड्राइविंग से हुए हैं। पुलिस भी इन हादसों के बाद भी नहीं चेत रही है। सिर्फ अभियानों में आंकड़ेबाजी का ही खेल चलता है। ट्रैफिक नियमों के मुताबिक राँग साइड ड्राइविंग पर जुर्माने के अलावा वाइन लाइसेंस सस्पेंड होने का प्राविधान है। इसके बाद भी कार्रवाई न के बराबर है। हाईवे पर ट्रेफिक पुलिस 24 घंटे गश्त भी नहीं करती है।


