तारीख निकलने के बाद भी भर सकते हैं रिटर्न
आयकर रिटर्न भरने के लिए तय 31 जुलाई की समयसीमा खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि आप अपना रिटर्न फाइल करने का मौका खो देंगे। करदाता 5,000 रुपये तक के विलंब शुल्क के साथ देरी से रिटर्न जमा कर सकते हैं। जिनकी कुल आय पांच लाख रुपये से अधिक नहीं, उनके लिए विलंब शुल्क 1,000 रुपये निर्धारित है।

नई दिल्ली, एजेंसी। आयकर रिटर्न भरने के लिए तय 31 जुलाई की समयसीमा निकलने का मतलब यह नहीं है कि आप अपना रिटर्न फाइल करने का मौका खो देंगे। करदाता वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अब भी ‘बिलेटेड रिटर्न’ (देरी से भरा जाने वाला रिटर्न) जमा कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए 5,000 रुपये तक की विलंब शुल्क देना पड़ सकता है। जिन लोगों की कुल आय पांच लाख रुपये से अधिक नहीं है, उनके लिए ज्यादा से ज्यादा विलंब शुल्क 1,000 रुपये तय किया गया है। देरी से रिटर्न आम तौर पर 31 दिसंबर, 2026 तक फाइल किया जा सकता है। देरी से फाइलिंग की फीस के अलावा, अगर एडवांस टैक्स, डीटीएस और अन्य उपलब्ध टैक्स क्रेडिट को समायोजित करने के बाद भी कोई टैक्स बकाया रहता है, तो करदाता को धारा 234ए के तहत ब्याज भी देना पड़ सकता है। यह ब्याज मूल निर्धारित तारीख से लेकर रिटर्न फाइल करने की तारीख तक हर महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए 1% की दर से लगाया जाता है।
किनको 31 जुलाई के बाद भी मिलता है समय?
जिन करदाताओं के खातों का टैक्स ऑडिट अनिवार्य होता है, उनके लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई नहीं होती। ऐसे मामलों में पहले ऑडिट की प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसके बाद रिटर्न दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाता है। यदि किसी वेतनभोगी व्यक्ति की आय के साथ ऐसा बिजनेस या प्रोफेशन भी जुड़ा है, जिसके कारण आयकर अधिनियम के तहत टैक्स ऑडिट आवश्यक हो जाता है, तो वह सामान्य 31 जुलाई की समयसीमा के दायरे में नहीं आता।


