आजम खां के जौहर ट्रस्ट अब ‘व्यक्तियों का संघ’, आयकर की छूट खत्म
-पद का दुरुपयोग कर 20 करोड़ की सरकारी जमीन 100 रुपये में ली लखनऊ मुख्य

आयकर विभाग (पीसीआईटी सेंट्रल, लखनऊ) ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष मोहम्मद आजम खां को बड़ा झटका दिया है। आयकर ने निर्धारण वर्ष 2020-21 से 2023-24 के लिए ट्रस्ट का पंजीकरण (धारा 12 एबी) रद्द कर दिया है, जिसका अर्थ है कि अब इसे आयकर छूट का लाभ नहीं मिलेगा और इसे ‘व्यक्तियों का संघ’ माना जाएगा।
आयकर विभाग का निर्णय
आयकर विभाग पीसीआईटी (सेंट्रल), लखनऊ के अधिकारी गौरव बाथम ने यह चिट्ठी जारी की है। इसमें कहा गया है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहम्मद आजम खान ने कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर किया। ₹20.44 करोड़ मूल्य की सरकारी संपत्ति को मात्र ₹100 वार्षिक किराए पर अपने ट्रस्ट को लीज पर दिलवाया। जिस भूमि और भवन को शोध कार्यों के लिए दिया गया था, वहां नियमों के विरुद्ध सीबीएसई स्कूल चलाया गया और केवल शैक्षिक कार्यों के लिए आवंटित भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया। जांच में सामने आया कि ट्रस्ट के गैर-पारिवारिक सदस्य केवल ‘डमी ट्रस्टी’ थे जिन्हें गतिविधियों की जानकारी नहीं थी। इसके अलावा, ट्रस्ट की संपत्ति का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों और समाजवादी पार्टी के कार्यालय (दारुल आवाम) के रूप में किया गया। ट्रस्ट की घोषित आय और बैंक जमा के बीच ₹59.25 करोड़ का बड़ा अंतर पाया गया, जिसका ट्रस्ट उचित मिलान नहीं दे सका।
वित्तीय अनियमितताएँ
डीवीओ रिपोर्ट के अनुसार परिसर में बने 59 भवनों के निर्माण की वास्तविक लागत ₹494.46 करोड़ आंकी गई है, जिसमें भारी बेहिसाब निवेश का संदेह है। आरोप है कि ठेकेदारों ने सरकारी योजनाओं (जैसे अशरा योजना) का पैसा विश्वविद्यालय के निर्माण में लगाया। साथ ही, कई दानदाता गैर-मौजूद या संदिग्ध पाए गए। ट्रस्ट ने मेडिकल कॉलेज और प्रशासनिक ब्लॉक को छोड़कर किसी अन्य भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं कराया और न ही फायर सेफ्टी एनओसी प्राप्त की। वहीं यह भी उल्लेख है कि ट्रस्ट ने पुलिस द्वारा दस्तावेज जब्त किए जाने और अन्य तर्कों के आधार पर बचाव किया, लेकिन विभाग ने इसे ‘गैर-वास्तविक गतिविधियों’ का स्पष्ट मामला माना है।


