आजम के जौहर ट्रस्ट को दान देने वाली 11 संस्थाएं कहीं हैं ही नहीं

हिन्दुस्तान, लखनऊ
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आयकर विभाग ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की छूट खत्म करने की चिट्ठी में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रस्ट को दान देने वाली संस्थाओं में से 11 का अस्तित्व नहीं है। बैंक जमा और घोषित आय में ₹59.25 करोड़ का अंतर पाया गया है। भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं हुए और फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन किया गया है।

आजम के जौहर ट्रस्ट को दान देने वाली 11 संस्थाएं कहीं हैं ही नहीं

- आयकर विभाग ने ट्रस्ट की छूट खत्म करने की चिट्ठी में सौंपे महत्वपूर्ण तथ्य, लगाए दस्तावेज -वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान बैंक जमा और घोषित आय के बीच 59.25 करोड़ का अंतर

महत्वपूर्ण तथ्य

-उन संस्थाओं की सूची जो अस्तित्व में नहीं हैं लेकिन उनके नाम पर ट्रस्ट को दान दिखाया गया था

दानदाता संस्थाएँ

- भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं, फायर सेफ्टी का उल्लंघन, यह भी आयकर ने दस्तावेजों के साथ बताया

विभाग का विवरण

- जौहर एसो. और सीके एसो. का सरकारी योजनाओं का पैसा विश्वविद्यालय निर्माण में लगाने का तथ्य

सरकारी योजनाएँ

- 18 मार्च 2024 को हाईकोर्ट लखनऊ के सरकारी जमीन वापस लेने के फैसले पर विभाग मुहर लगाई

लखनऊ मुख्य संवाददाता

पूर्व कैबिनेट मंत्री और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष मोहम्मद आजम खां पर आयकर के कई गंभीर आरोप हैं। आयकर विभाग पीसीआईटी सेंट्रल, लखनऊ ने उनके ट्रस्ट की छूट खत्म करने की चिट्ठी में कई दस्तावेज लगाए हैं। इनके मुताबिक ट्रस्ट को दान देने वाली 11 संस्थाएं कहीं हैं ही नहीं। आयकर ने निर्धारण वर्ष 2020-21 से 2023-24 के लिए ट्रस्ट का पंजीकरण (धारा 12 एबी) रद्द कर दिया है, जिसका अर्थ है कि अब इसे आयकर छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

ट्रस्ट के मुख्य व्यक्तियों जैसे मोहम्मद आजम खान, परवेज मियां और सीए दीपक गोयल के साथ-साथ ‘डमी ट्रस्टियों’ (जैसे चौधरी शहरयार सलीम और ज़ेड.आर. सिद्दीकी) के बयान साक्ष्य के रूप में शामिल हैं, जिनमें उन्होंने ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी न होने या दबाव में काम करने की बात स्वीकार की है। विभाग के मूल्यांकन अधिकारी (डीवीओ) की रिपोर्ट, जिसमें परिसर में बने 59 भवनों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ आंकी गई है, जो ट्रस्ट की बैलेंस शीट से मेल नहीं खाती। असेसमेंट वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान बैंक जमा और घोषित आय के बीच 59.25 करोड़ का अंतर पाया गया है। विभाग ने उन 11 संस्थाओं की सूची दी है जो अस्तित्व में नहीं हैं लेकिन उनके नाम पर ट्रस्ट को दान दिखाया गया था।

जिला पंचायत और मुख्य अग्निशमन अधिकारी की रिपोर्टें भी इसमें शामिल हैं, जो दर्शाती हैं कि भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं थे और फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन किया गया था। ठेकेदारों (जैसे जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स) द्वारा सरकारी योजनाओं का पैसा विश्वविद्यालय के निर्माण में लगाने और धन के हेरफेर के प्रमाण। इलाहाबाद उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अंश, जिनमें आजम खान द्वारा पद के दुरुपयोग और ‘नेपोटिज्म’ (भाई-भतीजावाद) के माध्यम से सरकारी संपत्ति को अपने निजी ट्रस्ट के लाभ के लिए इस्तेमाल करने की बात कही गई है।

डीवीओ रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में बने 59 भवनों के निर्माण की वास्तविक लागत ₹494.46 करोड़ आंकी गई है, जिसमें भारी बेहिसाब निवेश का संदेह है। आरोप है कि ठेकेदारों ने सरकारी योजनाओं (जैसे अशरा योजना) का पैसा विश्वविद्यालय के निर्माण में लगाया। साथ ही, कई दानदाता गैर-मौजूद या संदिग्ध पाए गए। ट्रस्ट ने मेडिकल कॉलेज और प्रशासनिक ब्लॉक को छोड़कर किसी अन्य भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं कराया और न ही फायर सेफ्टी एनओसी प्राप्त की। वहीं यह भी उल्लेख है कि ट्रस्ट ने पुलिस द्वारा दस्तावेज जब्त किए जाने और अन्य तर्कों के आधार पर बचाव किया, लेकिन विभाग ने इसे ‘गैर-वास्तविक गतिविधियों’ का स्पष्ट मामला माना है।

सामान्य प्रश्न

आयकर विभाग ने ट्रस्ट की छूट क्यों खत्म की?
आयकर विभाग ने ट्रस्ट की छूट खत्म करने की चिट्ठी में कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें यह दर्शाया गया कि ट्रस्ट को दान देने वाली 11 संस्थाएं कहीं हैं ही नहीं।

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