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LGBT के समर्थन में राहुल गांधी ने कहा- LOVE is LOVE तो लोग बोले- दिल जीत लिया सर

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीMrinal Sinha
Fri, 04 Jun 2021 07:41 AM
LGBT के समर्थन में राहुल गांधी ने कहा- LOVE is LOVE तो लोग बोले- दिल जीत लिया सर

समलैंगिकता को सम्मान और समलैंगिकों के अधिकार के लिए हर साल जून में LGBT प्राइड मंथ सेलिब्रेट किया जाता है। गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इसको लेकर शुभकामनाएं दीं। राहुल ने अपने इंस्टाग्राम पर रेनबो फ्लैग शेयर करते हुए लिखा कि शांतिपूर्ण व्यक्तिगत विकल्पों का सम्मान किया जाना चाहिए, प्यार सिर्फ प्यार होता है। एलजीबीटी के समर्थक राहुल के इस पोस्ट पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि नेता ने दिल जीत लिया। एक यूजर ने लिखा 'कम से कम कोई बड़ा नेता तो इसपर बोला, आपने इज्जत कमा ली सर'।  

ऐसा कहा जा रहा है कि भारत में ये पहली बार हो रहा है कि जब कोई इतना बड़ा नेता LGBT कम्युनिटी के पक्ष में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिख रहा है।इधर, राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस ने भी अपने ट्विटर अकाउंट पर रेनबो फ्लैग शेयर करते हुए लिखा। 'प्यार, प्यार होता है। सभी भारतवासियों को प्राइड मंथ की शुभकामनाएं।' 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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क्यों सेलिब्रेट किया जाता है प्राइड मंथ?

दरअसल, 28 जून, 1969 में LGBT कम्युनिटी के मेंबर्स पुलिस के खिलाफ हुए एकजुट हुए थे। जून वह महीना है जब दुनिया भर में हजारों लोग LGBTQ कम्युनिटी के सपोर्ट में एक साथ आगे आए थे। यही वजह है कि हर साल जून में LGBT प्राइड मंथ सेलिब्रेट किया जाता है

डूडल के जरिए गूगल की बधाई

इस प्राइड मंथ के दौरान 2 जून को सर्च इंजन गूगल ने भी अपने स्तर पर योगदान दिया। गूगल ने अमेरिकी समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता डॉ फ्रैंक कैमिनी की रंगीन माला पहने हुए फोटो में अपने होमपेज पर एक डूडल बनाया। बता दें कि फ्रैंक ने समलैंगिकता को सम्मान और उनके अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ी और अब समलैंगिकता को उसकी पहचान मिल चुकी है। गूगल ने कैमिनी को यूएस LGBTQ+ अधिकार राइट्स में सबसे अहम के तौर पर दिखाया है।

भारत में समलैंगिकता को वैधता

बता दें कि पहले भारत में दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए समलैंगिक सम्बन्धों को धारा 377 के तहत दंडनीय अपराधों की श्रेणी में रखा गया था लेकिन 6 सितंबर 2018 को, सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला जारी किया। न्यायालय ने सर्वसम्मति से फैसला दिया कि धारा 377 असंवैधानिक है क्योंकि यह स्वायत्तता, अंतरंगता और पहचान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस दिन भारत में समलैंगिकता को वैधता प्रदान की गई।

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