यूजी-पीजी, पीएचडी के अध्यादेश और विनियमावली का अनुमोदन
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि में विद्वत परिषद की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। स्नातक पाठ्यक्रम के दिशा-निर्देशों को पारित किया गया और नए पाठ्यक्रमों का अनुमोदन हुआ। परिषद ने विभागों के लिए नए शैक्षणिक कार्यों के संपादन हेतु आम सहमति भी दी। कुलपति ने ललित कला एवं संगीत विभाग को जागृत करने का आश्वासन दिया।

राजीव रंजन झा,दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के ऐतिहासिक दरबार हॉल में मंगलवार को कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित विद्वत परिषद की बैठक में विचार-विमर्श के बाद कई अहम निर्णय लिए गए। इन निर्णयों के लागू होने पर कई पाठ्यक्रमों के अध्यादेश व विनिमावली में बदलाव दिखने वाले हैं। लोक भवन, पटना से समय-समय पर जारी आदेशों-निर्देशों के आलोक में शास्त्री व आचार्य पाठ्यक्रमों में लाये जाने वाले संशोधनों पर बैठक में परिषद की मुहर लग गई। जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ. निशिकांत ने बताया कि बैठक में सर्वप्रथम विद्वत परिषद की तीन अगस्त 2024 दिवसीय कार्यवाही एवं कार्यान्वयन प्रतिवेदन को सम्पुष्ट किया गया। इसी तरह लोक भवन, पटना द्वारा स्नातक पाठ्यक्रम संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश तथा प्रवेश अध्यादेश आदि अधिसूचना को सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
पाठ्यक्रम के संशोधन
दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) तथा एक वर्षीय (दो सेमेस्टर) स्नातकोत्तर (आचार्य) पाठ्यक्रमों के प्रारूप अध्यादेश एवं विनियमों पर भी सदस्यों की स्वीकृति मिल गई। इसी तरह एकीकृत अध्यादेश एवं विनियम (पीएचडी उपाधि प्रदान करने के लिए न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया), 2026 को भी अनुमोदित कर दिया गया।
समर्थ पोर्टल का संपादन
2026-27 से समर्थ पोर्टल के माध्यम से संस्कृत विश्वविद्यालय में सभी शैक्षणिक कार्यों के संपादन पर आम सहमति रही। इसके साथ ही समर्थ पोर्टल के लिए विभाग/कॉलेज में विषयवार छात्रों के सीटों को निर्धारित किया गया। साथ ही दो वर्षीय उपशास्त्री के संशोधित पाठ्यक्रम को अनुमोदित करते हुए क्रियान्वयन पर भी स्वीकृति प्रदान की गई। शिक्षाशास्त्र विभाग में आईटीईपी पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने पर भी आम सहमति रही। पदोन्नति के लिए संकायाध्यक्षों द्वारा निर्मित विषय विशेषज्ञों की सूची को अनुमोदित करते हुए अग्रिम कार्यवाही के लिये सदस्यों ने कुलपति को अधिकृत कर दिया।
बैठक में विभिन्न मुद्दे
द्विवर्षीय संशोधित शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रम को भी परिषद की हरी झंडी मिल गयी। 26 नवंबर 2024 एवं 15 अप्रैल 2026 दिवसीय परीक्षा परिषद की कार्यवाही को भी अनुमोदित कर दिया गया। बैठक में धर्मशास्त्र विभागाध्यक्ष सह शोध प्रभारी प्रो. दिलीप कुमार झा ने विश्वविद्यालय में ललित कला एवं संगीत विभाग को जागृत करने का मुद्दा उठाया। इस पर कुलपति प्रो. पांडेय ने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
बैठक में संकायाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, प्रो. शिवलोचन झा, डॉ. शम्भुशरण तिवारी, विभागाध्यक्ष डॉ. सीताचरण झा, डॉ. रामनिहोरा राय, डॉ. संतोष पासवान, डॉ. धीरज कुमार पांडेय, डॉ. ध्रुव मिश्र सहित विभिन्न अंगीभूत एवं सम्बद्ध कॉलेजों के प्रधानाचार्य उपस्थित थे। सदस्यों का स्वागत डीएसडब्ल्यू प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने किया। शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग के रूप में ओएसडी शैक्षणिक डॉ. रामसेवक झा, डॉ. छविलाल न्यौपाने, राजेश कुमार झा, डॉ. गोपाल कुमार झा, गोपाल उपाध्याय, आकाश कुमार, सतीश शर्मा आदि थे।


