संस्कारों के बिना ज्ञान अधूरा, विद्वता भी बेकार
वाराणसी में विकास इंटर कॉलेज पर आयोजित सम्मान समारोह में जिला विद्यालय निरीक्षक भोलेंद्र प्रताप सिंह ने शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ विद्या तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी बोध होना आवश्यक है। सरकार शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। विद्यार्थी के जीवन में शिक्षा के साथ संस्कारों का होना बेहद जरूरी है। घर बच्चों की पहली पाठशाला है, जबकि विद्यालय उनके व्यक्तित्व को दिशा देते हैं। संस्कारों की मजबूत नींव पर ही व्यक्ति का बेहतर भविष्य तय होता है। ये बातें जिला विद्यालय निरीक्षक भोलेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को विकास इंटर कॉलेज परमानंदपुर में आयोजित सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति कितना भी विद्वान क्यों न हो, यदि संस्कार नहीं हैं तो उसका ज्ञान अधूरा है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अनुशासन, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी बोध होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार को बढ़ावा दे रही है। विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि यूपी बोर्ड के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कीर्तिमान स्थापित करें और बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार करें। विकास एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. एके सिंह ने डीआईओएस का स्वागत करते हुए कहा कि वाराणसी में उन्हें आए अभी कम समय हुआ है, लेकिन उनकी अगुवाई में शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में जिले का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। उनके नेतृत्व में अगस्त में वाराणसी में पहली बार प्रादेशिक विद्यालयीय हैंडबॉल प्रतियोगिता का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे। कॉलेज की सचिव डॉ. आशा सिंह ने संचालन किया।


