फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन रहेगा जारी
मोहन स्थित आईएमपीसीएल को निजी हाथों में सौंपे जाने के फैसले के खिलाफ कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों में आक्रोश है और वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। 43 दिनों से जारी इस धरना-प्रदर्शन में हजारों लोगों की नौकरी प्रभावित होने का डर है। अगर फैसला नहीं बदला गया तो आंदोलन और भी उग्र किया जाएगा।
सल्ट। मोहान स्थित आईएमपीसीएल को निजी हाथों में दिए जाने का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आईएमपीसीएल दवा फैक्ट्री की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी एक निजी दवा कंपनी को बेचने के फैसले के बाद से कर्मचारियों और प्रभावितों में आक्रोश है। इसके विरोध में बीते 43 दिनों से लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को भी लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि अगर सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो उन्हें आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कहा कि इस दवा फैक्ट्री से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोग जुड़े हुए हैं। इसके निजीकरण के बाद इन सभी लोगों पर आर्थिक संकट आ जाएगा। यह किसी भी हाल में लोगों के लिए उचित नहीं है। प्रदर्शन करने वालों में जयपाल सिंह रावत, भुपेंद्र सिंह अधिकारी, कुंदन सिंह मेहरा, देव सिंह, केसर सिंह, भाग्श्री घले, कमला अधिकारी आदि थे।


