चलती-चलती-- सोते समय हल्की रोशनी बिगाड़ रही दिल की सेहत
- 11 हजार से ज्यादा लोगों पर किया गया यह शोध - मांसपेशियां हुईं मोटी,

न्यू ऑरलियंस, एजेंसी। रात में सोते समय कमरे में हल्की-सी रोशनी भी आपके दिल की सेहत पर गलत असर डाल सकती है। इससे दिल की मांसपेशियों की बनावट में बदलाव देखने को मिला।
रोशनी का प्रभाव
वैज्ञानिकों का दावा है कि मोबाइल फोन की रोशनी, डिजिटल घड़ी की चमक या खिड़की से बाहर की स्ट्रीट लाइट भी नुकसानदायक है। अमेरिका के ट्यूलाने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 11 हजार से ज्यादा लोगों को सात दिनों तक कलाई पर एक सेंसर पहनाया गया। रात में उनके आसपास मौजूद रोशनी को रिकॉर्ड किया गया।
दिल की मांसपेशियों में बदलाव
तीन साल बाद एमआरआई में पाया गया कि 3 लक्स से ज्यादा रोशनी में सोने वाले लोगों के दिल के बाएं वेंट्रिकल की दीवार मोटी हो गई थी। इससे दिल में खून भरने की जगह कम हो सकती है। मांसपेशियों के लचीलेपन में भी कमी आई। दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। लक्स रोशनी पड़ने की तीव्रता को मापती है। चांद की रोशनी 1 से 3 लक्स तक होती है।
कम नींद से भी खतरा
शोधकर्ताओं के अनुसार, रोशनी के कारण कम नींद लेना भी दिल पर पड़ने वाले असर का एक अहम हिस्सा हो सकता है। इससे तनाव, उच्च रक्तचाप और दिल की गति में बदलाव आ सकता है। शोध के वरिष्ठ लेखक डॉ. लू क्यूई के मुताबिक, रात में रोशनी के संपर्क को कम करना भविष्य में हृदय रोग से बचाव की संभावित रणनीति हो सकती है। कमरे में जितनी ज्यादा रोशनी होगी, दिल पर असर भी उतना ही ज्यादा पड़ेगा।


