सीमा के नजदीक की फैक्ट्रियों ने संभाला नेपाल का निर्यात
नेपाल में जलप्रलय के बाद, भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। हालांकि निर्यात में अभी तक गिरावट कम दिखी है, लेकिन काठमांडू स्थित मुख्य मार्गों के लंबे समय तक बंद रहने पर इसका असर सभी उद्योगों पर पड़ेगा। जड़ी-बूटी और मसालों के कारोबार पर जलप्रलय का असर अधिक दिखाई दे रहा है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। नेपाल में जलप्रलय के बाद भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। नेपाल से भारत आने वाले कई प्रमुख सामानों के निर्यात में अभी तक अपेक्षाकृत ज्यादा गिरावट नहीं आई है। इसकी बड़ी वजह यह है कि निर्यात होने वाले कई उत्पादों की फैक्ट्रियां नेपाल के तराई और सीमा से सटे इलाकों भैरहवा, बुटवल, लुम्बनी में स्थित हैं। लेकिन काठमांडू रूट लंबा बंद रहा तो परेशानी बढ़नी तय है। नेपाल से भारत को पॉलिएस्टर यार्न, एसएस स्टील के बर्तन, प्लास्टिक, सीसी बोतल, स्क्रैप, जड़ी-बूटी, अदरक, तेजपत्ता, प्लाई बोर्ड, खाद्य तेल, धागा तथा सीमेंट क्लिंकर सहित कई उत्पादों का निर्यात होता है। इनमें से कई उत्पाद सीमा के आसपास स्थित औद्योगिक क्षेत्रों से तैयार होकर सीधे भारत की ओर भेजे जाते हैं。
हालांकि जड़ी-बूटी और मसालों के कारोबार पर जलप्रलय का असर अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देने लगा है।
इन उत्पादों का बड़ा हिस्सा नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से आता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
काठमांडू मार्ग बना सबसे बड़ी चिंता
व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल सीमा से लगे औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाले निर्यात पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन काठमांडू से जुड़े मुख्य मार्ग जल्द बहाल नहीं हुए तो आने वाले दिनों में इसका असर नेपाल के पूरे औद्योगिक और निर्यात कारोबार पर दिखाई दे सकता है। क्योंकि काठमांडू नेपाल का बड़ा व्यापारिक और उपभोग केंद्र है। मुख्य मार्ग लंबे समय तक बाधित रहने से माल की आवाजाही, कच्चे माल की आपूर्ति, तैयार माल की ढुलाई और बाजार तक पहुंच प्रभावित हो सकती है। सोनौली कस्टम सुपरिटेंडेंट संजय मिश्रा ने कहा कि अभी जो नेपाल भारत को सामान निर्यात करता है उसमें कुछ कमी तो हुई है, लेकिन बहुत कमी नहीं दिख रही है। सबसे ज्यादा खाद्य तेल नेपाल से भारत आता है।


