जलप्रलय के बाद से नेपाल के धार्मिक पर्यटन को झटका
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का असर पर्यटन उद्योग पर पड़ा है। अनुमानित 11.6 लाख विदेशी पर्यटक प्रभावित हुए हैं। धार्मिक स्थलों की यात्रा पर चिंता जताई जा रही है, खासकर कैलाश-मानसरोवर और लुंबिनी जैसे स्थलों पर। इससे स्थानीय व्यवसाय, होटल और ट्रैवल एजेंसियों पर नकारात्मक असर हुआ है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। नेपाल में आई आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का असर अब पर्यटन उद्योग के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन पर भी दिखाई देने लगा है। नेपाल में करीब 11.6 लाख विदेशी पर्यटकों के पहुंचने का अनुमान था। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों में आई गिरावट का सीधा असर होटल, ट्रैवेल एजेंसी, परिवहन, टैक्सी, गाइड और स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। जलप्रलय के बाद सबसे बड़ी चिंता धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राओं को लेकर है। नेपाल की पहचान केवल हिमालय और ट्रैकिंग पर्यटन तक सीमित नहीं है। पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ, जनकपुरधाम, लुंबिनी, स्वयम्भूनाथ, बौद्धनाथ और विभिन्न शक्तिपीठ भारत समेत दुनिया भर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड भी भारत में अपने प्रचार अभियान में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के तहत पशुपतिनाथ, कैलाश मानसरोवर और मुक्तिनाथ जैसे प्रमुख स्थलों को विशेष रूप से बढ़ावा देता रहा है.
शिव सर्किट पर असर
भारत से नेपाल जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सोनौली-भैरहवा-काठमांडू मार्ग महत्वपूर्ण है। पशुपतिनाथ, गुह्येश्वरी, मुक्तिनाथ, गोसाइंकुंड और अन्य शिव स्थलों को जोड़कर बनने वाला धार्मिक पर्यटन नेटवर्क भारतीय श्रद्धालुओं के लिए बड़ा आकर्षण है। लेकिन बाढ़ के बाद सड़क संपर्क, परिवहन और सुरक्षा को लेकर बनी चिंता ने तीर्थ यात्राओं की बुकिंग और यात्रा योजनाओं को प्रभावित किया है। विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में हुई आपदा ने कैलाश-मानसरोवर और अन्य उच्च हिमालयी धार्मिक मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ाई है.
बुद्ध सर्किट को भी झटका
भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में हर साल चार लाख से अधिक बौद्ध और अन्य पर्यटक पहुंचते हैं। भारत के कुशीनगर, सारनाथ और बोधगया के साथ जोड़कर विकसित किए जा रहे बौद्ध पर्यटन सर्किट में नेपाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया सहित कई देशों से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए लुंबिनी प्रमुख गंतव्य है.
रामायण सर्किट भी प्रभावित
नेपाल का जनकपुरधाम रामायण सर्किट का महत्वपूर्ण केंद्र है। माता सीता की जन्मभूमि जनकपुर को अयोध्या सहित भारत के प्रमुख रामायण स्थलों से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाता है। लेकिन सीमा पर आवागमन, नेपाल के अंदर सड़क संपर्क और बाढ़ की खबरों से पैदा हुई आशंकाएं रामायण सर्किट के पर्यटन कारोबार पर भी असर डाल सकती हैं.
मुक्तिनाथ और स्वामीनारायण यात्रा पर भी असर
मुक्तिनाथ धाम नेपाल में भारतीय श्रद्धालुओं के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में है। यहां पहुंचने वाले यात्रियों से होटल, टैक्सी, ट्रैवेल एजेंसी, स्थानीय गाइड और छोटे व्यापारियों को रोजगार मिलता है। नेपाल में भारतीय तीर्थ यात्रियों की बढ़ती संख्या से मुक्तिनाथ के आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता रहा है। इसी तरह स्वामीनारायण और अन्य हिंदू धार्मिक स्थलों की यात्रा पर भी असर पड़ रहा है.
सोनौली सीमा पर भी दिख रहा असर
नेपाल के धार्मिक पर्यटन में भारतीय श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होने के कारण सोनौली-भैरहवा सीमा पर इसका असर सीधे महसूस होता है। श्रद्धालुओं के साथ टैक्सी, बस, होटल, ट्रैवल एजेंसी, मुद्रा विनिमय, रेस्टोरेंट और सीमा बाजार का कारोबार जुड़ा हुआ है। पर्यटन कारोबारिय बलबीर सिंह, बैजू, सीपी श्रेष्ठ का कहना है कि इसका असर सोनौली में साफ तौर पर दिख रहा है.


