‘भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व कल्याण के लिए सर्वश्रेष्ठ’
प्रयागराज में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ के तहत 'एकात्म मानववाद में भारतीय ज्ञान परंपरा की समझ' विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया। मुख्य वक्ता सिद्धयोगी आदिनारायण ने फाउंडेशन की बात की। कार्यक्रम में कई विद्वानों और छात्रों की उपस्थिति रही।

प्रयागराज, कार्यालय संवाददाता। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ के तत्वावधान में वर्तमान सत्र के प्रथम विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन मंगलवार हुआ। संस्कृति संगम सभागार में आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘एकात्म मानववाद में भारतीय ज्ञान परंपरा की समझ’ रहा।मुख्य वक्ता गुरु अनादि फाउंडेशन के सह संस्थापक सिद्धयोगी आदिनारायण ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आत्मा से परमात्मा तक का बोध कराती है। यह वैज्ञानिक, लौकिक और परलौकिक ज्ञान के साथ ही जीवन के उद्देश्यों का वास्तविक बोध कराती है। यही एकात्म मानववाद का मूल भाव है। अध्यक्षता करते हुए शांतनू गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में नैतिकता और लोक कल्याण दोनों निहित हैं।
इसलिए भारत विश्वगुरु बनने की पूरी क्षमता रखता है। अतिथियों का स्वागत पीठ के चेयर प्रोफेसर प्रो. हर्ष कुमार ने किया। विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकांत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. आनंद शंकर सिंह, डॉ. अतुल नारायण सिंह, डॉ. सर्वेश सिंह, डॉ. अरविंद, डॉ. पंकज, डॉ. मृत्युंजय, डॉ. जितेंद्र सिंह नौलखा, डॉ. अमित सिंह, डॉ. आशीष धर त्रिपाठी, डॉ. राजेश सिंह, अनुराग कुमार यादव सहित शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


