छात्र आंदोलन में घायल हुई छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
आईआईटी पटना की छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है जिसमें आंदोलन/विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रित करने के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग की गई है। याचिका में पुलिसकर्मियों के पहचान बैज अनिवार्य करने की भी माँग की गई है, क्योंकि छात्रा पुलिस की कार्रवाई में घायल हुई थी।

आईआईटी पटना की एक छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आंदोलन/विरोध प्रदर्शन में भीड़ नियंत्रित करने को एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग की है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में प्रदर्शनों में तैनात पुलिसकर्मियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए ‘नाम का बैज’ लगाने को अनिवार्य करने की मांग की है। याचिकाकर्ता तोशिवा यादव ने याचिका में दावा किया कि पेपर लीक के मुद्दे पर 20 जुलाई को नई दिल्ली में ‘संसद चलो’ विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में वह घायल हो गई थी। याचिका में छात्रा ने विरोध प्रदर्शन में तैनात पुलिसकर्मियों की पहचान जरूरी करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की है। अधिवक्ता नेहा राठी के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया कि लोगों के खिलाफ अत्यधिक बल के इस्तेमाल में अनजान लोगों की मौजूदगी भागीदारी पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाती है, खासकर तब जब ऐसे लोग कथित तौर पर वर्दी पहने पुलिसवालों के साथ या उनकी मौजूदगी में काम कर रहे थे।
कोई भी व्यक्ति जवाबदेही से न बच सके
याचिका में आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ बल के इस्तेमाल में शामिल हर व्यक्ति की पहचान, उसकी भूमिका की एक स्वतंत्र जांच की भी मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों के साथ की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति सही पहचान या वर्दी की कमी के कारण जवाबदेही से बच न सके।
पुलिसकर्मियों ने नेम प्लेट और पहचान बैज नहीं पहने थे
पटना की छात्रा ने इस मुद्दे पर पहले से लंबित रिट याचिका में अपनी अर्जी दाखिल की है। याचिकाकर्ता यादव ने कहा कि जब संसद मार्च के बाद वह विरोध स्थल से लौटते रही थी, उसी समय ऐसे पुलिसकर्मियों ने उन पर हमला किया जो वर्दी में थे लेकिन उन्होंने नेम प्लेट या पहचान बैज नहीं पहने थे। याचिका में दावा किया कि उनके सिर के पिछले हिस्से में गहरी चोट लगी है, जिसके लिए तुरंत मेडिकल इलाज और टांके लगाने पड़े। याचिका में आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया।


