माल परिवहन तंत्र में सुधार से बच सकते हैं करोड़ों रुपये : रिपोर्ट
आईआईएम मुंबई की एक रिपोर्ट के अनुसार, डीएफसी और एमएमएलपी द्वारा देशभर में सामानों के परिवहन के तरीके में सुधार लाकर हर साल लगभग सात लाख करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं। यह परिवर्तन एक करोड़ नौकरियां भी उत्पन्न कर सकता है। इतने लोगों की जरूरत होगी कि 2030 तक डिपार्टमेंट को 1.15 करोड़ अतिरिक्त काम करने वालों की आवश्यकता होगी।

आईआईएम मुंबई की रिपोर्ट में हुआ खुलासा संस्थान का दावा-एक करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी
मुंबई, एजेंसी। समर्पित माल ढुलाई गलियारा (डीएफसी) और बहु-आयामी माल परिवहन और भंडारण पार्क (एमएमएलपी) की मदद से देशभर में सामान के परिवहन के तरीके को बदलकर हर साल लगभग सात लाख करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं। इससे करीब एक करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी।
रिपोर्ट का विवरण
इस संबंध में भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई (आईआईएम) ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय को इस संबंध में एक रिपोर्ट सौंपी है। माल ढुलाई के क्षेत्र में भविष्य की प्रतिभा और आवश्यकताएं विजन- 2047 की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बदलाव देश के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
आईआईएम का दावा
आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रो. मनोज तिवारी ने कहा, डीएफसी और एमएमएलपी तेज और अधिक कुशल माल ढुलाई तंत्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके जरिए देशभर में सामान लाने और ले जाने के तरीकों को बदलकर भारत हर साल लगभग सात लाख करोड़ रुपये बचा सकता है। इससे करीब एक करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी। निदेशक तिवारी के अनुसार, इससे सामान के परिवहन का समय कम होगा, सप्लाई चेन की विश्वसनीयता बढ़ेगी और माल की लागत कम होगी।
भविष्य की आवश्यकताएं
उन्होंने कहा, ये दोनों परियोजनाएं मील का पत्थर साबित होंगी। प्रो. तिवारी की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट समीक्षा के लिए शिक्षा मंत्रालय को सौंपी गई है। इसके अनुसार, 2030 तक माल ढुलाई क्षेत्र में लगभग 1.15 करोड़ अतिरिक्त काम करने वालों की जरूरत होगी। इससे व्यापार और अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक लाभ होगा।


