आईसीएफआरई ने वानिकी वृक्षों की 18 उन्नत किस्मों और क्लोन को दी मंजूरी

हिन्दुस्तान, देहरादून
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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) ने 18 उच्च उत्पादक वृक्ष प्रजातियों और क्लोन के विमोचन को मंजूरी दी है। इनका विकास बेहतर उपज, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादकता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे रोपण वानिकी का सुधार होगा और आर्थिक लाभ भी बढ़ेगा।

आईसीएफआरई ने वानिकी वृक्षों की 18 उन्नत किस्मों और क्लोन को दी मंजूरी
आईसीएफआरई ने वानिकी वृक्षों की 18 उन्नत किस्मों और क्लोन को दी मंजूरी

देहरादून। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) ने महत्वपूर्ण वानिकी वृक्ष प्रजातियों की 18 उच्च उत्पादक किस्मों और क्लोन के विमोचन को मंजूरी दी है। इनका विकास बेहतर उपज, गुणवत्ता, रोग-प्रतिरोधक क्षमता, अनुकूलनशीलता और उत्पादकता को ध्यान में रखकर किया गया है। इससे रोपण वानिकी, कृषि वानिकी और औद्योगिक लकड़ी उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। किस्म विमोचन समिति (वीआरसी) की बैठक रविवार को वन महानिदेशक एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी की अध्यक्षता और आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी की सह-अध्यक्षता में हुई। बैठक में 18 उन्नत किस्मों और क्लोन को मंजूरी दी गई।

आईसीएफआरई-वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान (आईएफजीटीबी), कोयंबटूर ने कैजुअरीना के दो क्लोन आईएफजीटीबी-सीएच-2 और आईएफजीटीबी-सीएच-5 विकसित किए हैं, जिन्हें पहली बार अखिल भारतीय स्तर पर विमोचन के लिए अनुशंसित किया गया। वहीं आईसीएफआरई-वन उत्पादकता संस्थान, रांची ने मेलिया डुबिया की पांच और फ्लेमिंगिया सेमियालाटा की दो उन्नत किस्में विकसित की हैं। आईएफजीटीबी ने सागौन की तीन और कदंब की तीन उन्नत क्लोन भी विकसित किए हैं। इसके अलावा आईसीएफआरई-काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु ने आंध्र प्रदेश वन विभाग के सहयोग से विकसित सागौन की तीन क्लोन के क्षेत्रीय विमोचन की सिफारिश की है। इन उन्नत आनुवंशिक सामग्रियों से उत्पादकता और आर्थिक लाभ बढ़ने के साथ सतत वानिकी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Shailendra Semwal

लेखक के बारे में

Shailendra Semwal

शॉर्ट बायो : शैलेन्द्र सेमवाल पिछले 28 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में दैनिक हिन्दुस्तान देहरादून में सीनियर कंटेंट क्रिएटर के रुप में कार्यरत हैं।


परिचय एवं अनुभव:

पिछले 28 सालों के सफर में शैलेन्द्र सेमवाल ने प्रिंट मीडिया क्षेत्र में विविध विषयों वाले आलेख लिखे हैं। 2008 से वह हिन्दुस्तान के मसूरी सेंटर के प्रभारी रहे। उनके विषयों में इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, शोधात्मक, विश्लेणात्मक, लाइफ स्टाइल, फैशन, फिल्म वर्ल्ड और घटनात्मक खबरें रही हैं। एक फीचर कंटेंट राइटर के रुप में उन्होंने समग्र विषयों पर लिखा है। इतिहास, आंचलिक विषयों और मुद्दों पर उनका गहन अध्ययन है।


कॅरियर का सफर

शैलेन्द्र सेमवाल ने अपने प्रिंट लेखन की शुरूआत अपने स्टडी के दौरान ही कर ली थी। 2003 में अमर उजाला देहरादून में बतौर ट्रेनी कॅरियर शुरू किया। 2004 में विकासनगर और मसूरी अमर उजाला के बतौर ब्यूरो प्रमुख काम किया। वह शिमला, पौड़ी जैसी जगहों पर अमर उजाला, जागरण और हिन्दुस्तान के लिए लिख चुके हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख पत्रिकाओं में भी उनका लेखन चल रहा था। 2008 में उत्तराखंड में हिन्दुस्तान लांच होने के बाद से वह हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं। 2010 से देहरादून में कार्यरत हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि:

शैलेन्द्र सेमवाल ने सन 2000 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि से एमएससी जूलोजी करने के बाद बीजे और एमजेएमसी की डिग्री हासिल की। साहित्य रंगकर्म से जुड़ाव से उनका रुझान पत्रकारिता की ओर हुआ। साहित्य, संस्कृति, मनोरंजन, इतिहास, विज्ञान जैसी बीट पर कमांड है। उनकी शोध परक अनेक लेख ऑल एडिशन, फ्रंट पेज पर प्रकाशित होते रहे हैं।


एंटरटेनमेंट और विजन

कॅरियर में आर्ट, कल्चर, एंटरटेनमेंट, राज्य की राजनीति से जुड़े विषयों पर कई सेलिब्रिटी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का अवसर मिला। शैलेन्द्र सेमवाल का मानना है कि पत्रकारिता में विषयों की बुनियादी समझ होना जरुरी है। लगातार गहराई से जानने की जिज्ञासा रखना ही सार्थक पत्रकारिता महत्वपूर्ण अंग है।


विशेषज्ञता:

बॉलीवुड, उत्तराखंडी फिल्म संगीत, लोककला, नृत्य, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, किसी भी सेलिब्रिटी का उत्तराखंड कनेक्शन तलाशना, हिमालयी पर्यावरण, पारिस्थितिकी, सामाजिक मुद्दे, पर्यावरणीय आंदोलन, राज्य आंदोलन, राज्य का इतिहास, खोजपरक स्टोरी।

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