क्षेत्रफल घटा पर तकनीक से बढ़ी दलहन की पोषणयुक्त पैदावार
कानपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की वार्षिक बैठक में डॉ. एमएल जाट ने कृषि में तकनीक के इस्तेमाल और दलहन फसलों की पैदावार को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद को आवश्यक बताया और जलवायु अनुकूल तकनीकों के विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया।

कानपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि, अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव डॉ. एमएल जाट ने कहा कि कृषि में तकनीक का तेजी से प्रयोग हो रहा है। वैज्ञानिक तकनीक की मदद से उन्नत प्रजातियां विकसित कर रहे हैं। पिछले सालों में करीब 16 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्रफल होने के बावजूद गुणवत्तायुक्त पैदावार में वृद्धि हुई है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में दो दिवसीय अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन अनुसंधान परियोजना की 31वीं वार्षिक समूह बैठक का आयोजन हुआ। शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. एमएल जाट, विवि के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने किया।
डॉ. जाट ने कहा कि दलहन अनुसंधान में वर्तमान चुनौतियों की प्राथमिकता निर्धारित कर लक्ष्य आधारित कार्ययोजना बनाना आवश्यक है। किसान के लिए पैदावार के साथ लाभ पाना प्राथमिकता है। दलहन फसलों की पैदावार में आ रही बाधाओं को दूर करते हुए ‘उपज बाधा’ को तोड़ने तथा स्पष्ट उत्पादकता लक्ष्य निर्धारित करने की जरूरत है। जैविक एवं अजैविक तनावों के प्रभाव को कम करने के लिए जलवायु अनुकूल एवं तनाव सहनशील तकनीकों के विकास की आवश्यकता बताई। वर्तमान में वैज्ञानिक पोषणयुक्त फसलों के लिए बीज विकसित कर रहे हैं। उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डीके यादव ने कहा कि उपलब्ध नवीन प्रजातियां एवं सफल तकनीक का दलहनी फसलों में समावेश कर दलहन के पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. एसके झा ने बताया गया कि दलहन के कुल पैदावार में 60 फीसदी की भागीदारी रबी दलहनी फसलों की है। दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन का यौगिकीकरण भी करती हैं। आईआईपीआर के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने कहा कि वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच में तकनीकी खाई को पूरा करने के लिए जागरूकता जरूरी है। विवि के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया गया कि दलहन पैदावार में विवि की सार्थक भूमिका है। इस मौके पर डॉ. बीआर चौधरी, डॉ. पीके सिंह, डॉ. मसूद अली, डॉ. खलील खान आदि मौजूद रहे।अटारी में ‘कृषक चौपाल एवं प्रदर्शनी: किसान–वैज्ञानिक नवाचार संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। शुभारंभ मुख्य अतिथि आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट रहे। पद्मश्री किसान चंद्रशेखर सिंह, सीएसए विवि के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, महिला उद्यमी नीलम त्यागी ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नवाचारों तथा किसानों की भूमिका पर जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) किसानों को सशक्त बनाकर विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, केवीके किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक जानकारी एवं नवाचारों को पहुंचाने का काम कर रहे हैं। डॉ. जाट ने किसानों एवं वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया। अटारी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. रंजय सिंह, डॉ. आरआर बर्मन आदि मौजूद रहे।


